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Exclusive: विदेशी निवेशकों के आने से बढ़ेगा रोजगार- जेटली

चीन द्वारा गूगल और फेसबुक पर बैन लगाए जाने का उदाहरण देते हुए जेटली ने कहा कि हमने इस तरह के कदम नहीं उठाए हैं, क्‍योंकि हम चीन की तर्ज पर नहीं सोच रहे हैं

Updated On: Feb 04, 2018 05:13 PM IST

FP Staff

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Exclusive: विदेशी निवेशकों के आने से बढ़ेगा रोजगार- जेटली

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि भारत में विदेशी निवेशकों का स्‍वागत है, क्‍योंकि हम उदार अर्थव्‍यवस्‍था में यकीन करते हैं. हालांकि उन्‍होंने अन्‍य मुल्‍कों द्वारा अपनाई जा रही संरक्षणवादी नीतियों पर चिंता जताई. न्‍यूज18 नेटवर्क के साथ एक एक्‍सक्‍लूसिव इंटरव्‍यू में उन्‍होंने हाल में अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्‍प द्वारा एच1बी वीजा को महंगा बनाने की भी चर्चा की.

जेटली ने कहा, 'मैं इस बात को लेकर चिंतित हूं, क्‍योंकि अगर इस तरह की प्रवृति मजबूत होती है तो सभी देश ऐसे ही कदम उठाएंगे. हमारे अनुभव इस बात के साक्षी हैं कि इकोनॉमी को उदार बनाने से हमें मदद मिली है.'

वित्‍त मंत्री ने कहा कि पिछले ढाई दशक के दौरान जिन चीजों ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को बेहतर और बड़ा बनाने में हमारी मदद की है, उनसे आज हम अपनी बेहतरी के प्रति अधिक आश्‍वस्‍त हैं. हम चाहते हैं कि देश में विदेशी निवेश आए. हम यह नहीं सोचते कि विदेशी निवेशकों का भारत आना हमारी इकोनॉमी के लिए घातक है. आज की तारीख में हम उन्‍हें ऐसी ताकत के रूप में देखते हैं जो हमारे देश में पूंजी लाकर यहां रोजगार के अवसर बढ़ाएंगे.

चीन द्वारा गूगल और फेसबुक पर बैन लगाए जाने का उदाहरण देते हुए जेटली ने कहा कि हमने इस तरह के कदम नहीं उठाए हैं, क्‍योंकि हम चीन की तर्ज पर नहीं सोच रहे हैं. हम विदेशी निवेशकों का स्‍वागत करते हैं. गौरतलब है कि चीन ने घरेलू कंपनियों Baidu और WeChat को बढ़ावा देने के लिए गूगल और फेसबुक पर बैन लगा रखा है.

जेटली ने कहा कि बड़ी आबादी और बड़े मानव संसाधन की वजह से हमने दुनियाभर के लगभग हर मुल्‍क में बड़ी संख्‍या में राष्‍ट्रवादी लोगों को भेजा है. यही वजह है कि अगर आज आप न्‍यूजीलैंड में क्रिकेट मैच देखते हैं तो आपको वहां की टीम में कई सारे भारतीय मिल जाएंगे.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पिछले महीने वर्ल्‍ड इकोनॉमिक फॉरम के अपने संबोधन में संरक्षणवाद की मुखालफत की थी. मोदी ने कहा था कि संरक्षणवादी ताकतें वैश्‍वीकरण के खिलाफ काम कर रही हैं. उनका मकसद न सिर्फ वैश्‍वीकरण को धता बताना है, बल्कि वे पूंजी के स्‍वाभाविक प्रभाव के भी खिलाफ हैं. यही वजह है कि आज दुनियाभर में नई तरह की टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाएं और सीमाएं खिंची जा रही हैं.

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