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EXCLUSIVE: बढ़ती तेल की कीमतें चिंता का विषय हैं-अरुण जेटली

जेटली ने कहा कि अगर ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें मैनेज करने लायक सीमा में रहें और मानसून सामान्य रहे तो देश की वृद्धि दर तेज हो सकती है

FP Staff Updated On: Feb 03, 2018 09:06 PM IST

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EXCLUSIVE: बढ़ती तेल की कीमतें चिंता का विषय हैं-अरुण जेटली

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इस तेजी के चलते महंगाई और अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर असर पड़ सकता है.

जेटली ने कहा, 'हमें देखना पड़ेगा कि कच्चा तेल किस स्तर तक जाएगा. अभी तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल को छू रही हैं. ये तेल की कीमत की सामान्य सीमा का आखिरी स्तर है.'

नेटवर्क18 को दिए एक एक्सलूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमत मैनेज करने लायक बनी रहती है और मानसून सामान्य रहता है, देश की ग्रोथ रेट तेज हो सकती है. वित्तमंत्री ने कहा, 'इन परिस्थितियों (सामान्य मानसून और स्थिर तेल की कीमतें) में हमारी अपेक्षाओं का स्तर बढ़ सकता है.'

2017-18 का इकनॉमिक सर्वे इस सप्ताह संसद में पेश किया गया. इस सर्वे में भी कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर चिंता जाहिर की गई है. इसमें कहा गया है कि महंगा होता क्रूड ऑयल आने वाले साल की जीडीपी ग्रोथ पर नकारात्मक असर डाल सकता है. 2017-18 के पहले तीन क्वार्टर में तेल की कीमतें पिछले साल की तुलना में 16 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं. चीफ इकनॉमिक एडवाइज़र अरविंद सुब्रमण्यम ने सोमवार को कहा कि तेल के हर बैरल पर 10 यूएस डॉलर की तेजी, जीडीपी को 0.2-0.3 परसेंटेज पॉइंट तक नीचे ले आती है. इसके साथ ही इससे 'कैड' (करेंट अकाउंट डेफिसिट) का घाटा 9 से 10 बिलियन डॉलर तक बढ़ जाता है.

नवंबर की शुरुआत में जहां क्रूड ऑयल 50 डॉलर प्रति बैरल पर था. अब इसकी कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं. इकनॉमिक सर्वे ऑफ इंडिया ने अनुमान लगाया है कि जीडीपी की ग्रोथ 2018-19 में 7 से 7.5 प्रतिशत तक रह सकती है. इस साल जीडीपी ग्रोथ 6.65 रही. इनके पीछे जीएसटी और नोटबंदी के चलते पैदा हुए अवरोध प्रमुख कारण थे.

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