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सरकार ने क्यों पेश किए अर्थव्यवस्था के फील गुड आंकड़े?

सरकार आंकड़ों के जरिए अर्थव्यवस्था पर लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है... क्या इसकी वजह चुनाव है?

Updated On: Oct 24, 2017 09:59 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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सरकार ने क्यों पेश किए अर्थव्यवस्था के फील गुड आंकड़े?

फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने ट्वीट करके बताया कि वे अर्थव्यवस्था पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. प्रेस कॉन्फ्रेंस का पूरा फोकस अर्थव्यवस्था की मजबूती से जुड़े आंकड़े पेश करने पर रहे. महंगाई, जीडीपी, चालू खाता घाटा और भारत माला परियोजना...हर उस आंकड़े पर बात हुई जिससे अर्थव्यवस्था की मजबूती का सबूत मिले.

नोटबंदी और जीएसटी के बाद निश्चित तौर पर जीडीपी की ग्रोथ घटी है. सरकार पहले कई बार कह चुकी है कि जब भी हम कोई रिफॉर्म करते हैं तो अर्थव्यवस्था की ग्रोथ पर उसका असर होता है. यह बात खुद फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली और उनके सहयोगी अधिकारी कई बार कह चुके हैं. फिर अब ऐसी क्या जरूरत थी कि अरुण जेटली को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सफाई देनी पड़ी.

चुनाव प्रचार तो नहीं? 

अगले महीने नवंबर में हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं. उसके बाद गुजरात में चुनाव होंगे. ऐसे में इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से ऐसा लग रहा है कि सरकार लोगों के मन से अर्थव्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं को खत्म करना चाहती है. राजस्व विभाग के अधिकारियों ने जिस तरह से एक-एक करके अपनी योजनाओं के बारे में बता रहे थे. उससे यह साफ था कि सरकार का निशाना कुछ और है.

जीएसटी लागू होने के बाद छोटे कारोबारियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं. ऐसे में सरकार को यह डर भी सता रहा है कि कहीं कारोबारी वर्ग बिदक न जाए. शायद यही वजह है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले अरुण जेटली ने कारोबारियों के हित में अहम फैसला किया था. सरकार ने अगस्त और सितंबर में जीएसटी रिटर्न पर लेटी फीस नहीं लेने का फैसला किया है. सरकार ने ट्वीट करके बताया कि अगस्त और सितंबर में जिन कारोबारियों से लेट फीस ली है वह उनके टैक्स लेजर में वापस कर दिया जाएगा.

सरकार का एक अहम फैसला सरकारी बैंकों के सपोर्ट को लेकर था. उन्होंने सरकारी बैंकों के लिए  2.11 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान किया. इसमें से 1.35 लाख करोड़ रुपए रीकैप बॉन्ड्स से जुटाए जाएंगे. बाकी की रकम मार्केट और बजटीय सपोर्ट से आएगा.

फिस्कल ईयर  2014-15 और 2017-18 के बीच बैंकों ने 3 लाख करोड़ से अधिक के लोन दिए. यह पिछले 10 वर्षों में दी गई रकम के 10 गुणा से भी ज्यादा है. सरकार की योजना 2019 तक यह रकम सरकारी बैंकों को देने वाली है. सरकार बैंकिंग रिफॉर्म की योजना पर भी काम कर रही है और आगे आने वाले दिनों में कई अहम फैसले ले सकती है.

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