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अनबन के बाद संसदीय समिति के सामने RBI गवर्नर ने किया मोदी सरकार का बचाव

वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली के नेतृत्व वाली इस पैनल में पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह भी शामिल थे

Updated On: Nov 27, 2018 06:13 PM IST

FP Staff

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अनबन के बाद संसदीय समिति के सामने RBI गवर्नर ने किया मोदी सरकार का बचाव

मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने संसदीय समिति के सामने नरेंद्र मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले का बचाव किया. साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि इसके प्रभाव अस्थाई थे. वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली के नेतृत्व वाली इस पैनल में पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह भी शामिल थे.

समिति के सामने कच्चे तेल की कीमतों में कमी पर उत्साह व्यक्त करते हुए पटेल ने कहा, 'अर्थव्यवस्था के लिए कम कीमतें बेहतर साबित होंगी.' अन्य सभी सवालों पर आरबीआई गवर्नर दस दिनों के भीतर लिखित जवाब देंगे.

सरकार और आरबीआई के संबंधों पर भी हुई चर्चा

केंद्र के साथ आरबीआई के हालिया मनमुटाव पर पैनल ने अपना पक्ष रखा. रिजर्व बैंक और केंद्र के बीच तनाव मुख्य रूप से दो मुद्दों पर था. पहला, सरकार के रिफॉर्म्स आरबीआई की पॉलिसी की वजह से लटकी रहती हैं. और दूसरी, सरकार चाहती है कि आरबीआई के पास जो सरप्लस फंड है उसका इस्तेमाल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में किया जाए.

अगर ऐसा है तो समिति जानना चाहती है कि इस सरप्लस की मात्रा पर निर्णय कैसे लिया जाएगा और क्या इसकी गणना के लिए एक नई और कम कठोर प्रणाली की आवश्यकता है.

मनमोहन सिंह ने हाल ही में कहा था कि वित्त मंत्रालय और आरबीआई के बीच संबंध काफी खराब हो गए हैं. वह नोटबंदी के मुखर आलोचक भी रहे हैं. गौरतलब है कि आरबीआई ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि नोटबंदी के बाद 500 और 1000 के 99 प्रतिशत से ज्यादा नोट बैंकों में वापस आ गए थे. जिनकी कीमत 15.3 लाख करोड़ रुपए थी.

कई मामलों पर समिति को ब्रीफ करेंगे पटेल

वित्त मामलो की 31 सदस्यीय स्थायी संसदीय समिति एनपीए के अलावा कई अन्य मुद्दों पर भी बातचीत करेगी. जिसमें आईबीसी के प्रस्ताव, और भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति जैसे मामले शामिल हैं. अनुमान लगाए जा रहे हैं कि आरबीआई के गवर्नर विकास दर, मुद्रास्फीति पूर्वानुमान और इसकी वर्तमान सीमा के साथ-साथ अर्थव्यवस्था की स्थिति पर पैनल को ब्रीफ करेंगे.

समिति के एक सदस्य के मुताबिक वह केंद्रीय बैंक प्रशासन में सुधारों के बारे में भी बात करेंगे जिन्होंने सरकार और बाहरी और स्वतंत्र निदेशकों को बोर्ड पर अधिक अधिकार दिए हैं. पीसीए बैंकों के सुधारात्मक उपायों और इसके परिणाम, केंद्रीय बैंक रिजर्व पर वैश्विक मानदंड साझा करना और नोटबंदी से संबंधित मामलों पर भी चर्चा की जाएगी.

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