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जेपी इंफ्रा के बाद आम्रपाली के ग्राहक भी सुप्रीम कोर्ट की शरण में

नोएडा अथॉरिटी बिल्डर को दिवालिया घोषित करके सबसे पहले अपना बकाया हासिल करना चाहती है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Sep 21, 2017 09:08 PM IST

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जेपी इंफ्रा के बाद आम्रपाली के ग्राहक भी सुप्रीम कोर्ट की शरण में

आम्रपाली बिल्डर के निवेशक भी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में दायर याचिका के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गए हैं. पिछले सप्ताह ही एनसीएलटी ने बैंक ऑफ बड़ौदा की आम्रपाली को दिवालिया घोषित करने की याचिका मंजूर कर ली थी.

नोएडा के सेक्टर 76 स्थित आम्रपाली सिलिकॉन सिटी पर नोएडा अथॉरिटी का 650 करोड़ रुपए बकाया है. बकाया रकम हासिल करने के लिए नोएडा अथॉरिटी भी एनसीएलटी पहुंच गई है.

जेपी इंफ्रा के ग्राहकों को राहत  

जेपी इंफ्रा के हजारों निवेशकों को पिछले महीने ही सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली थी. आम्रपाली बिल्डर के निवेशक भी इसी उम्मीद से एनसीएलटी में दायर याचिका के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं.

पिछले दिनों ही एनसीएलटी ने इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी आम्रपाली मैनेजमेंट से छीनकर आईआरपी राजेश सैमसन को सौंपी थी. नोएडा अथॉरिटी के मुताबिक नोएडा में लीज पर आवंटित प्रॉपर्टी पर पहला हक नोएडा अथॉरिटी का है, इसलिए एनसीएलटी में मंगलवार को 650 करोड़ रुपए बकाए का क्लेम किया गया है. इससे जब भी कंपनी दिवालिया होगी तब वह पहले नोएडा अथॉरिटी के हितों का ध्यान रखेगी.

जेपी इंफ्राटेक को एनसीएलटी ने पिछले 10 अगस्त को दिवालिया घोषित कर दिया था. जेपी इंफ्रा के दिवालिया होने से फ्लैट खरीदने वाले सैकड़ों लोग बीच मझधार में फंस गए थे. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलटी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी.

क्या है खरीदारों का पक्ष?

इस मुद्दे पर फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए निवेशकों के वकील राहुल कुमार कहते हैं, ‘देखिए जेपी बिल्डर के मामले में कोर्ट ने जो निर्णय दिए हैं, आम्रपाली के निवेशकों के बारे में भी इसी तरह के फैसले का अनुमान है. जेपी का भी वही मामला है जो आम्रपाली का है.’

राहुल कुमार आगे कहते हैं, ‘अगर सुप्रीम कोर्ट दिवालिया वाले फैसले को बरकरार रखेगी तो फ्लैट खरीददार बिल्डर्स से पैसा नहीं ले सकेंगे. सरकार भी कई तरह के प्रावधान कर निवेशकों को उनका हक दिला सकती है.’

बैंकरप्सी एंड डेट डिस्पोजेबल इनएबिलिटी एक्ट (दिवालिया एवं कर्ज शोधन अक्षमता कानून) के तहत आम्रपाली और जेपी इंफ्राटेक पर कार्रवाई की गई है.

कब मिलेगा ग्राहकों का हक?

खरीदार केंद्र सरकार और योगी सरकार से यह सवाल पूछ रहे हैं कि उन्हें अपना हक कब मिलेगा. उनका कहना है कि बिल्डर की प्रॉपर्टी नीलाम करके बैंक तो अपना पैसा वसूल रहे हैं लेकिन घर खरीदारों का क्या होगा.

खरीदारों की यही चिंता है कि उनके पैसे वापस कैसे मिलेंगे? क्या सरकार कोई ठोस कार्रवाई करके बेईमानों पर शिकंजा कसेगी. अगर दूसरे बिल्डर भी ऐसे दिवालिया होते गए तो घर खरीदारों के पास क्या विकल्प बचेगी.

कैसे उनके डूबे हुए पैसे निकलेंगे? क्या सरकार कोई ठोस कार्रवाई करके बेइमान बिल्डरों पर शिकंजा कसेगी? बिल्डरों की संपत्ति सील कर खरीदारों को घर दिलाना क्या मुमकिन है? बिल्डर के जाल में फंसे खरीददारों की मांग है कि सरकार अब सीधे मामले में दखल देकर या तो उन्हें घर दिलाए या फिर पैसे वापस करवाए.

क्या होगा आगे?

नोएडा के सेक्टर 76 स्थित आम्रपाली सिलिकॉन सिटी का एरिया एक लाख 76 हजार 758 वर्ग मीटर का है. सिलिकॉन सिटी में लगभग पांच हजार फ्लैट बने हैं. इसमें लगभग 21 टावर बनकर तैयार हैं. सात टावर पेंडिंग है, इसमें लगभग एक हजार के करीब बायर्स बिना आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के रह रहे हैं.

जब राजेश सैमसन को यहां आईआरपी नियुक्त किया गया था तो उन्होंने बायर्स के साथ बैठक की. राजेश सैमसन का कहना था कि इस प्रॉजेक्ट जो निवेशक अपनी बकाया रकम चाहते हैं. इनमें नोएडा अथॉरिटी भी अहम है.

नोएडा अथॉरिटी के सीईओ आलोक टंडन और एडिशनल सीईओ अटल कुमार राय ने मंगलवार को ही 37 प्रॉजेक्टों की रिव्यू मीटिंग की थी. इस मीटिंग में इन प्रॉजेक्टों से जुड़े बिल्डर भी मौजूद थे.

इस मीटिंग के दौरान पता चला कि इन प्रॉजेक्टों के 29 हजार फ्लैट्स के कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए अभी तक अप्लाई ही नहीं किया गया है.

नोएडा ऑथरिटी के मुताबिक यह रिव्यू मीटिंग उन बिल्डरों के लिए बुलाई गई थी जिनके प्रॉजेक्टों की रफ्तार सबसे धीमी हैं. य जहां पर अभी भी काफी निर्माण कार्य बचा है.

एक तरफ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी लगातार कहती आ रही है कि पहले बायर्स के हितों का ध्यान रखा जाएगा. लेकिन, दूसरी तरफ नोएडा अथॉरिटी बिल्डर को दिवालिया घोषित कर अपना हित साधने में लगी हुई है.

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