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देश में रिटेल कारोबार की शक्ल बदलेगी 'इंडिया की नई दुकान'

Updated On: Sep 16, 2018 09:00 PM IST

FP Staff

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देश में रिटेल कारोबार की शक्ल बदलेगी 'इंडिया की नई दुकान'
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जयपुर में एक नई रिटेल स्टोर ‘इंडिया की नई दुकान’ खुलने वाली है. स्थानीय लोगों को किराना स्टोर का विकल्प देने के लिए इस स्टोर की शुरुआत की गई है. जयपुर में 14 ऐसे रिटेल स्टोर खोलने की तैयारी है.

भारत के कुल रिटेल बाजार में 69 प्रतिशत हिस्सेदारी किराना रिटेल की है. यह लगभग 552 अरब डॉलर का अनुमानित बाजार है, जिसमें 92 प्रतिशत यानी लगभग 504 डॉलर का बाजार असंगठित है. किराना किंग के पीछे असली मकसद इस क्षेत्र को संगठित बनाना और तमाम कारोबारी चुनौतियों को खत्म कर सभी किराना दुकानों को कामयाबी और खुशी की किरणों से चमकाना है.

भारत में सभी क्षेत्रों में रिटेल कारोबार का तरीका बेहद तेजी से बदल रहा है. उपभोक्ताओं को खरीदारी का तरीका भी तेजी से बदल रहा है और ऑनलाइन कारोबार भी दिनोंदिन बढ़ रहा है. लेकिन किराना की दुकानें लंबे समय से ऐसी ही हैं. इसलिए बड़ा सवाल यह है कि यदि वे कारोबार के नए तरीके नहीं अपनाएंगी तो आगे जाकर उनका अस्तित्व कैसे बच पाएगा? इसी सवाल से किराना किंग ने जन्म लिया, जिसका स्पष्ट उद्देश्य मानकीकरण, केंद्रीकरण तथा डिजिटलीकरण पर जोर देते हुए और भारत में किराना की दुकानों को नया रूप एवं एकसमान ब्रांड पहचान मुहैया कराते हुए मौजूदा किराना रिटेल कारोबार को मजबूत करना है.

भारत में मोटे तौर पर किराना की 1.20 करोड़ दुकानें हैं, जिनमें 80 प्रतिशत रिटेल के पुराने तौर-तरीकों वाले छोटे पारिवारिक कारोबार के रूप में चल रही हैं. किराना रिटेल को ताकत देने की आकांक्षा के साथ किराना किंग 2025 तक जयपुर में इसी प्रकार की 500 किराना दुकानें और देश भर में 10,000 किराना दुकानें खोलने जा रही है. इसका कारण भी स्पष्ट है. भारतीय किराना रिटेल उद्योग की देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 16 प्रतिशत हिस्सेदारी है और देश में कुल रोजगार का 8 प्रतिशत इसी क्षेत्र से उत्पन्न होता है.

कंपनी किराना किंग के फाउंडर और सीईओ अनूप कुमार खंडेलवाल के नेतृत्व में सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है. खंडेलवाल ने कहा, ‘हमने स्थानीय किराना रिटेल को ठीक से समझने के लिए पहले जयपुर और उसके आसपास तथा बाद में पूरे भारत में शोध किया. हमारे विशेषज्ञों ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पारंपरिक तथा आधुनिक किराना प्रणालियों का भी अध्ययन किया. गहन शोध के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे कि समस्या मांग में नहीं है बल्कि कारोबार करने के असंगठित तरीके में है.'

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