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खादी क्षेत्र में गई 7 लाख नौकरियां, उत्पादन और बिक्री बढ़ी!

सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि इसी अवधि के दौरान खादी सेक्टर में उत्पादन में 31.6 फीसदी और बिक्री में 33 फीसदी की उछाल आई है

FP Staff Updated On: Mar 11, 2018 04:09 PM IST

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खादी क्षेत्र में गई 7 लाख नौकरियां, उत्पादन और बिक्री बढ़ी!

क्या खादी उद्योग में काम कर रहे लोग बड़े पैमाने पर अपनी नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं? आधिकारिक आंकड़े तो यही कह रहे हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय ने लोकसभा में जो डाटा दिया है, उसके मुताबिक खादी सेक्टर में 2015-16 और 2016-17 के बीच काम कर रहे लोगों की संख्या 11.6 लाख से घटकर 4.6 लाख हो गई है.

वैसे तो आंकड़ों को करीब से देखने पर यह लगता है कि इसे और स्पष्ट करने की जरूरत है. लेकिन यह पता नहीं चल पाया है कि आधुनिकीकरण की वजह से नौकरियां गई हैं या किसी और वजह से.

सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि इसी अवधि के दौरान खादी सेक्टर में उत्पादन में 31.6 फीसदी और बिक्री में 33 फीसदी की उछाल आई है. खादी और ग्रामीण उद्योग कमीशन (केवीआईसी) के मुताबिक 2015-16 तक के रोजगार के आंकड़ों की सही तस्वीर नहीं है क्योंकि इसमें तब पैदा हुई नई नौकरियों को जोड़ा नहीं गया था और नौकरी छोड़ चुके लोगों का आंकड़ा भी जोड़ा नहीं गया था.

इस वजह से गई हैं नौकरियां!

हालांकि केवीआईसी ने यह माना कि नए मॉडल के चरखों द्वारा पुराने तरीके के चरखों की जगह लेना कुछ लोगों की नौकरी छोड़ने की वजह हो सकती है. कमीशन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि एक तकली वाले पारंपरिक चरखों पर ज्यादातर सूत कातने वाले काम करते थे, इससे अधिक लोगों को रोजगार भी मिलता था. लेकिन नए मॉडल के चरखों को अपनाने से बहुत से पुराने सूत कातने वाले इस रोजगार से बाहर हो गए. हालांकि मंत्रालय और कमीशन ने यह नहीं बताया है कि इस वजह से कितने लोगों की नौकरी गई है.

नौकरी छोड़ने वालों में सबसे अधिक संख्या मध्य क्षेत्र में है. कुल 6.8 लाख में से 3.2 लाख लोगों ने इस क्षेत्र से नौकरी छोड़ी है. इस क्षेत्र में उत्तराखंड, यूपी, छत्तीसगढ़ और एमपी शामिल है. इसके बाद पूर्वी क्षेत्र में करीब 1.2 लोगों ने नौकरी छोड़ी है. इसमें बिहार, बंगाल, झारखंड, ओडिशा और अंडमान एवं निकोबार आते हैं.

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत भी 2017-18 के बीच रोजगार में गिरावट आ रही है. लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार इस कार्यक्रम के तहत 2015-16 में 3.2 लाख लोगों को रोजगार मिला, 2016-17 में यह बढ़कर 4.1 लाख हो गई. 2017-18 के पहले के 10 महीने के आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 2.5 लाख लोगों को ही रोजगार मिला है.

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