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2जी स्कैम: जानिए कब क्या हुआ इस मामले में!

गुरुवार को सीबीआई के 80,000 पेज के चार्जशीट और लंबी सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट में इस घोटाले पर फैसला सुनाया गया

Updated On: Dec 21, 2017 04:39 PM IST

FP Staff

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2जी स्कैम: जानिए कब क्या हुआ इस मामले में!

2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में गुरुवार को सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाया. इस मामले में ए राजा और कनिमोड़ी के साथ सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है. 2जी स्कैम आजाद भारत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला माना जाता है. गुरुवार को सीबीआई के 80,000 पेज के चार्जशीट और लंबी सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट में इस घोटाले पर फैसला सुनाया गया.

इस घोटाले के मुख्य आरोपियों में तत्कालीन टेलीकॉम मंत्री ए. राजा, डीएमके नेता करुणानिधि की बेटी और राज्यसभा सांसद कनीमोडी, तत्कालीन टेलीकॉम सेक्रेट्री सिद्धार्थ बेहरुआ और ए. राजा के मंत्री रहते उनके निजी सचिव रहे आरके चंदोलिया शामिल थे.

आइए जानते हैं इस घोटाले में कब-कब क्या हुआ:

- मई 2007 में ए. राजा टेलीकॉम मिनिस्टर बने

- अगस्त 2007 में टेलीकॉम विभाग ने 2जी स्पैक्ट्रम के लाइसेंस आवंटन का काम शुरू किया

- 2 नवंबर 2007 को प्रधानमंत्री ने राजा को चिट्ठी लिखकर आवंटन में पारदर्शिता बरतने और फीस के ठीक से रिव्यू करने को कहा. राजा ने पीएम को चिट्ठी लिखकर कहा कि मेरे कई सिफारिशों को खारिज कर दिया गया है.

- 22 नवंबर 2007 को वित्त मंत्रालय ने टेलीकॉम विभाग को चिट्ठी लिखकर लाइसेंस देने के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया पर अपने चिंताओं से अवगत करवाया.

- 10 जनवरी, 2008 को टेलीकॉम विभाग ने लाइसेंस देने के लिए ‘पहले आओ- पहले पाओ’ की नीति अपनाई और इसके लिए कट-ऑफ की तारीख 25 सितंबर तक के लिए बढ़ा दी गई.

- 4 मई, 2009 को एनजीओ टेलीकॉम वॉचडॉग ने सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) में 2जी स्पैक्ट्रम के लाइसेंस आवंटन में अनियमितता की शिकायत की.

- 21 अक्टूबर, 2009 को सीबीआई टेलीकॉम विभाग के अज्ञात अफसरों और अज्ञात पर एफआईआर दायर किया.

- 10 नवंबर, 2010 को कैग ने भारत सरकार को 2जी आवंटन मामले में अपनी रिपोर्ट दी और कहा कि इस मामले में 1.76 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.

- 17-18 फरवरी, 2011 को डी राजा को न्यायिक हिरासत में भेजा गया.

- 14 मार्च, 2011 को इस मामले की सुनवाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने विशेष अदालत का गठन किया.

- 2 अप्रैल, 2011 को सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की.

- 25 अप्रैल, 2011 को सीबीआई ने दूसरी चार्जशीट दाखिल की जिसमें डीएमके नेता कनीमोडी का भी नाम शामिल था.

- 11 नवंबर, 2011 को विशेष अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई.

- 12 दिसंबर, 2011 को सीबीआई ने तीसरी चार्जशीट दाखिल की.

- 2 फरवरी, 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने राजा के कार्यकाल में हुए 2जी लाइसेंस के आवंटनों को रद्द करके, 4 महीने के भीतर लाइसेंस के लिए फिर से निविदा मंगवाने को कहा.

- 1 जून, 2015 को ईडी ने कहा कि कलईगनर टीवी को 2जी आवंटन से 200 करोड़ रुपए का फायदा पहुंचा है.

- 19 अप्रैल, 2017 को इस केस की सुनवाई खत्म हुई.

-21 दिसंबर 2017 सीबीआई की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी किया.

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