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2जी घोटाला मामले से जुड़े ये सवाल अब भी अनसुलझे हैं

2जी घोटाले पर कोर्ट का फैसला आने के बाद सबसे बड़ा सवाल ये है कि आरोपियों पर कैसी धाराएं लगाई गई थीं कि ट्रायल 6 साल तक चला

FP Staff Updated On: Dec 24, 2017 07:51 PM IST

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2जी घोटाला मामले से जुड़े ये सवाल अब भी अनसुलझे हैं

2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में दिल्ली के पटियाला हाउस के स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सभी 17 आरोपियों को बरी कर दिया है. इसमें डीएमके सुप्रीमो ए. करुणानिधि की बेटी कनिमोड़ी और पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा  शामिल हैं.

1,552 पन्नों के अपने विस्तृत आदेश में कोर्ट ने कहा कि सीबीआई इस मामले में दोषियों के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रही है. कोर्ट ने सभी आरोपियों को भले ही राहत दे दी हो, लेकिन कुछ सवाल के जवाब अब भी नहीं मिले हैं.

ये घोटाला यूपीए सरकार के दौरान हुआ था. सीबीआई के स्पेशल जज ओपी सैनी ने 2जी घोटाले में सीबीआई और ईडी की ओर से दर्ज अलग-अलग मामलों में फैसला सुनाया. 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सुनवाई छह साल पहले 2011 में शुरू हुई थी, जब अदालत ने 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे.

इन सवालों के नहीं मिले जवाब:-

1- इस घोटाले पर कोर्ट का फैसला आने के बाद सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आरोपियों पर कैसी धाराएं लगाई गई थी कि ट्रायल 6 साल तक चला. 1, 552 पन्नों के अपने विस्तृत आदेश में जस्टिस सैनी ने बताया कि कैसे उन्होंने इस घोटाले में सबूत के लिए 7 साल तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कोर्ट में इंतजार किया. लेकिन, कोई दस्तावेज और सबूत पेश नहीं किए गए.

2- दूसरा सवाल ये है कि क्या कैग की इतने बड़े घोटाले की जांच निराधार थी? अगर नहीं, तो ऐसा क्या हुआ कि आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया. अगर कोई घोटाला हुआ ही नहीं था, तो सीबीआई 10 साल तक किस चीज की जांच कर रही थी?

3- अप्रैल 2011 में 80,000 पन्नों की चार्जशीट में सीबीआई ने क्या लिखा था. ऐसी कौन सी धाराएं लगाई गई थी, जिनके लिए कोई सजा ही नहीं हुई?

4- 6 साल तक चले ट्रायल के दौरान सीबीआई ने 125 गवाह पेश किए. 654 पेजों के दस्तावेज भी सौंपे. ऐसे में सीबीआई किसी भी आरोपियों पर आरोप क्यों नहीं साबित कर पाई? आखिर इतने सालों तक चले मामले में सीबीआई दलील, आरोप और सबूत में तालमेल क्यों नहीं बैठा पाई?

5- सीबीआई ने चार्जशीट में स्वान टेलीकॉम और कलिंग्नार टीवी पर रिश्वत देने का आरोप लगाया था. सीबीआई के मुताबिक, स्पेक्ट्रम लाइसेंस पाने के लिए स्वान टेलीकॉम और कलिंग्नार टीवी ने 200 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी फिर आरोप का क्या हुआ?

6- नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) ने रिपोर्ट में कहा था कि स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में 'पहले आओ- पहले पाओ' की तर्ज पर नियम को पलट दिया गया था. कोर्ट में सीबीआई ये साबित क्यों नहीं कर पाई?

7-नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) 2-जी घोटाले में भारत सरकार के खजाने को 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपये के नुकसान होने की बात कही थी? वो क्या था? इसके आंकड़े सीबीआई ने पेश क्यों नहीं किए?

8- ए. राजा के दूरसंचार मंत्री रहते सुप्रीम कोर्ट ने आवंटित सभी 122 लाइसेंस रद्द कर दिए थे. ए. राजा के बरी होने के बाद यह सवाल और बड़ा हो गया है कि ये लाइसेंस क्यों रद्द कर दिए गए थे?

9- अगर कोई घोटाला नहीं हुआ था, तो वो आंकड़े कहां से आएं, जिनका जिक्र इस केस में किया गया था?

10- अगर घोटाला हुआ ही नहीं है तो फिर राजा, कनिमोझी, यूनिनॉर जैसी कंपनियों के अधिकारियों ने जो कई साल जेल में काटे उनका हिसाब कौन देगा?

(लेखक - उत्कर्ष आनंद)

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