लालू यादव जेल भी गए तो अध्यक्ष की कुर्सी पर खड़ाऊं रखकर आगे बढ़ेगी आरजेडी

इस बात की पूरी तैयारी हो गई है कि लालू प्रसाद यादव के निर्देशों पर ही पार्टी आगे बढ़ती रहेगी

Kanhaiya Bhelari

लालू यादव का आरजेडी का नेशनल प्रेसिडेंट बनना लगभग पक्का है. अगर वो किसी अपराधिक मुकदमे में जेल चले जाते हैं तब भी वही अध्यक्ष होंगे. उन्हीं के नाम की घोषणा की जाएगी और अध्यक्ष के चेयर पर उनके ‘खड़ाऊं’ की प्राण प्रतिष्ठा करके संगठन को मजबूत करने का काम किया जाएगा. अध्यक्ष का चुनाव 21 नवंबर को होना है.

ये खबर आरजेडी के बेहद गोपनीय सूत्रों से मिली है. इस खबर से यकीनन उन लोगों जोर का झटका लगेगा जो इस मुहिम में लग हुए थे कि किसी तरह तेजस्वी यादव को इस पद पर बिठाकर यादव परिवार में सत्ता के लिए जारी तनातनी को और धारदार बना दिया जाए. वैसे, ये शक्तियां अब भी होपफुल है कि ‘हम होंगे कामयाब एक दिन’.


इस मुहिम में परिवार की एक अतिमहत्वाकांक्षी नेता लगी हैं जिनका दिल भी इस पद को पाने के लिए टिक-टिक कर रहा है. महिला नेत्री की शह पर आरजेडी के कुछ नेता तो सक्रिय हैं ही, सरकारी पार्टी के कई महारथी भी अप्रत्यक्ष रूप से बागी आरजेडी नेताओं को यादव परिवार में आग लगाने के लिए माचिस सप्लाई कर रहे हैं.

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ये बागी नेता खुलकर बोल नहीं रहे हैं लेकिन लालू यादव से किसी न किसी कारणवश खफा चल रहे हैं. ‘इस माचिस की डिब्बी में केवल झगड़ा बढ़ाने की तिलियां हैं’. ऐसा दावा है मुहिम में शामिल एक कद्दावर नेता का.

दूसरी तरफ कुछ पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में दाढ़ी प्रेमी एक नेता ने भविष्यवाणी भी की है कि आरजेडी की राष्ट्रीय अध्यक्ष कोई महिला हो सकती है जो लालू परिवार के बीच की होगी. इनके अनुसार बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी की संभावना ज्यादा है.

उनका तर्क है कि ‘1997 में चारा घोटाले में जेल जाने से पूर्व लालू यादव ने अपनी पत्नी को सीएम की कमान सौंपी थी जबकि कयास लग रहे थे कि या तो प्रोफेसर जाबिर हुसैन या जगदानन्द सिंह को बिहार के यादव श्रेष्ठ अपना उत्तराधिकारी बनायेंगे और जेल यात्रा के वापसी के बाद पुनः मुख्यमंत्री पद पर आसीन हो जाएंगे.

यादव दरबार में बिना रोक-टोक के विचरण करने वाले बताते हैं कि लालू यादव को कुछ लोग कनविन्स कर रहे हैं कि वो तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंप कर निश्चिंत हो जाएं. तेजस्वी समर्थकों का कहना है, 'ऐसा करने से तेजस्वी यादव का कद बढ़ेगा और हर कोण से अपने मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नीतीश कुमार के समकक्ष दिखेंगे.

अब तो आरजेडी सुप्रीमो के इशारे पर राज्य के आरजेडी अध्यक्ष रामचन्द्र पूर्वे ने भावी सीएम तो घोषित कर ही दिया है. कई मौके पर स्वयं भी लालू प्रसाद ने हिंट किया है कि तेजस्वी यादव ही उनके उत्तराधिकारी होंगे.

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लेकिन आरजेडी के ओल्ड गार्डस और सिर से नख तक लालू भक्त नेताओं को डर है कि तेजस्वी यादव को अध्यक्ष बनाने से यादव कुल में महाभारत होने की संभावना बढ़ जाएगी. ऐसी स्थिति में यादव कुल का बड़ा चिराग व कृष्ण भक्त तेज प्रताप यादव खुलकर विद्रोही हो जाएंगे क्योंकि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं सागर जल की तरह हिलोरें मार रही हैं.

तेजस्वी यादव को भावी सीएम की घोषणा करने से वे नाराज हो गए हैं. कभी भी विद्रोह की बिगुल फूंक सकते हैं अगर लालू यादव तेजस्वी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की घोषणा करते हैं.

पर्दे के पीछे रहकर लालू यादव को सकारात्मक सलाह देने वाले आरजेडी के एक नेता का विश्लेषण है कि नीतीश कुमार राजनीतिक मगरमच्छ हैं, जो पानी में ही लड़ाई जीत सकते हैं. जबकि लालू यादव गज हैं जो जमीन का अपराजेय लड़ाका होता है.

'नीतीश कुमार इस काम में लगे हैं कि किसी भी तरह लालू परिवार के बीच में सत्ता संघर्ष करा दें और शांति से राज करते रहें. लेकिन हमलोग ये होने नहीं देगे'. वो आगे कहते हैं, 'आगे आने वाली दिनों में जितनी भी राजनीतिक जंग होगी वो लालू यादव के नेतृत्व में ही लड़ी जाएंगी. हां, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव बारी-बारी से हर जंग के सेनापति होगें'.

बताते हैं कि राबड़ी देवी की भी यही मंशा है कि साहब ही आरजेडी का नेतृत्व करते रहें. ताकि उनके जीवित रहते परिवार में टूट-फूट न हो. भीतरखाने से छनकर आ रही न्यूज पर भरोसा करें तो राबड़ी देवी ने वैसे भक्तों को डांट पिलाई है, जो तेजस्वी यादव को नेशनल प्रेसिडेंट बनाने की वकालत कर रहे थे.

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