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तुलसी विवाह 2017: तुलसी विवाह के दिन ऐसे करें तुलसी की पूजा

तुलसी का विवाह शालिग्राम रूपी भगवान श्रीकृष्ण से किया जाता है

FP Staff Updated On: Oct 30, 2017 05:07 PM IST

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तुलसी विवाह 2017: तुलसी विवाह के दिन ऐसे करें तुलसी की पूजा

देवउठनी एकादशी को तुलसी विवाह उत्सव भी कहा जाता है. तुलसी विवाह का महत्व हिंदू धर्म में इसलिए भी  ज्यादा है क्योंकि इस दिन से ही शादी-विवाह का लग्न शुरू हो जाता है. शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने सोने के बाद जागते हैं. जो भी महिलाएं कार्तिक स्नान करतीं हैं वे इस दिन तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम से करवातीं हैं.

तुलसी विवाह के पीछे क्या है कहानी?

तुलसी विवाह के दिन तुलसी का विशेष पूजन किया जाता है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान श्री शालिग्राम का विवाह तुलसी से हुआ था. तुलसी का विवाह शालिग्राम रूपी भगवान श्रीकृष्ण से किया जाता है. भगवान श्रीकृष्ण भगवान विष्णु जी के आठवें अवतार हैं. इस दिन लोग अपने घरों में प्रबोधनी एकादशी का व्रत करते है. तुलसी का विवाह भगवान श्रीकृष्ण से करवाते हैं. विवाह के बाद प्रसाद के रूप में चरणामृत बांटा जाता है.

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तुलसी विवाह के दौरान क्या करें?

- तुलसी विवाह के समय शाम को तुलसी के पौधे को घर के आंगन या छत के बीचों-बीच में रखा जाना चाहिए.

- ऐसा माना जाता है कि जैसे किसी कन्या की शादी में चुनरी का महत्व होता है ठीक उसी तरह से तुलसी विवाह में लाल चुनरी का प्रयोग महत्वपूर्ण होता है.

- तुलसी विवाह में सुहाग की सारी चीजों के साथ लाल चुनरी जरूर चढ़ानी चाहिए.

क्या है तुलसी का महत्व ?

- तुलसी को धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष महत्व दिया जाता है.

- तुलसी के पौधे का प्रयोग यज्ञ, हवन, पूजन, कर्मकांड, साधना और उपासना आदि में होता है.

- तुलसी का इस्तेमाल पवित्र भोग में किया जाता है. इस दिन मंदिरों में भगवान श्री कृष्ण की विशेष पूजा होती है.

श्री कृष्ण का नाम वृंदावन बिहारी कैसे पड़ा?

तुलसी का एक नाम वृंदा है. प्राचीन भारत में मथुरा के आसपास कई योजन में फैला इसका एक विशाल वन था, जिसे वृंदावन कहते थे. वृंदा यानी तुलसी से प्रेम होने के कारण द्वापर युग में भगवान विष्णु, कृष्णावतार में, यहां विहार करते थे. इसलिए उनका एक नाम वृंदावन बिहारी भी है.

तुलसी विवाह में किस चीज से बनाए मंडप?

जिस प्रकार किसी शादी समारोह में विवाह मंडप होता है.उसी तरह से गन्ने का प्रयोग करके तुलसीजी और भगवान विष्णु के विवाह के लिए मंडप बनाया जाता है.

क्या हैं तुलसी के लाभ?

-  आयुर्वेद के अनुसार, तुलसी के नियमित सेवन से व्यक्ति के विचार में पवित्रता, मन में एकाग्रता आती है.

-  क्रोध पर नियंत्रण होता है.

- आलस्य दूर हो जाता है. शरीर में दिन भर स्फूर्ति बनी रहती है.

- औषधीय गुणों की दृष्टि से तुलसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है.

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