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धर्म की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे गुरु तेग बहादुर

मुगल शासक औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर जी को हिंदुओं की मदद करने और इस्लाम नहीं अपनाने के वजह से उन्हें मौत की सजा सुना दी

Updated On: Nov 22, 2017 02:16 PM IST

FP Staff

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धर्म की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे गुरु तेग बहादुर

गुरु तेग बहादुर जी सिखों के नौवें गुरु थे. अपने धर्म और इमान की रक्षा करते हुए उन्होंने अपनी जान तक दे दी थी. उनकी इसी शहादत के याद में 24 नवंबर को गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस मनाया जाएगा.

1 अप्रैल, 1621 को अमृतसर में पैदा हुए गुरु तेग बहादुर जी का बचपन का नाम त्यागमल था. गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों और हिंदुओं की बहुत मदद की. उनकी धर्म की रक्षा करते हुए उन्होंने अपने प्राणों की बिल्कुल भी चिंता नहीं की.

मुगल शासक औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर जी को हिंदुओं की मदद करने और इस्लाम नहीं अपनाने के कारण उन्हें मौत की सजा सुना दी. इस्लाम अपनाने से इनकार करने की वजह से औरंगजेब के शासनकाल में उनका सर कलम कर दिया गया. गुरु जी को धर्म और आदर्शों के लिए जान दे देने वाले गुरुओं में गिना जाता है.

जहां गुरु जी की हत्या हुई और जिस जगह उनका अंतिम संस्कार किया गया उन दोनों जगहों पर उनकी याद में गुरुद्वारा बनाया गया है. जहां उनकी हत्या हुई वहां पर बने गुरुद्वारे का नाम शीश गंज साहिब है, जो उनके धर्म की रक्षा के लिए किए गए कार्यों को हमें याद दिलाता रहता है.

एक धर्म के रक्षक के रूप में उनके बलिदानों को यह देश भूल नहीं सकता. उन्होंने न सिर्फ धर्म की रक्षा की बल्कि देश में धार्मिक आजादी का मार्ग भी प्रशस्त किया जो आज भी कायम है.

गुरु तेग बहादुर जी हमेशा ही सिख धर्म मानने वाले और सच्चाई की राह पर चलने वाले लोगों के बीच रहा करते थे. इसी दौरान जब वो पटना की यात्रा पर थे, तो सिखों के दसवें और आखिरी गुरु, गुरु गोविंद सिंह का जन्म हुआ.

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