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सोमवती अमावस्या: 27 साल बाद बन रहा है खास योग, होगा कालसर्प दोष का निवारण

माना जाता है कि इस दिन तड़के स्नान और फिर सारे दिन पूजा-पाठ और दान-दक्षिणा करने से पुण्यलाभ होता है

FP Staff Updated On: Apr 16, 2018 09:35 AM IST

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सोमवती अमावस्या: 27 साल बाद बन रहा है खास योग, होगा कालसर्प दोष का निवारण

आज यानी 16 अप्रैल को सोमवती अमावस्य है. सोमवार को अमावस्य के पड़ने से ये सोमवती अमावस्य के नाम से जानी जाती है. ये अमावस्य साल में केवल एक या दो बार ही पड़ती है. इस साल 16 अप्रैल को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या पर खास योग पर बन रहा है जो 27 साल बाद आया है. बैसाख महीने में सोमवार को अश्विन नक्षत्र सूर्य और चंद्रमा एक साथ आ रहे है. ऐसा मेल बहुत कम देखा जाता है जो आज से करीब 27 साल पहले देखा गया था. इसी के साथ कालसर्प दोष से परेशान लोगों के लिए ये राहत का अवसर साबित हो सकता है.

इस दिन का महत्व

माना जाता है कि इस दिन तड़के स्नान और फिर सारे दिन पूजा-पाठ और दान-दक्षिणा करने से पुण्यलाभ होता है. आज के दिन पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है इसलिए इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत भी कहा जाता है. गंगा स्नान का सोमवती अमावस्या के रोज विशेष महत्व है. आज के दिन पूजा से स्वास्थ्य और सौभाग्य लाभ होता है. इस दिन विवाहित स्त्रियां पति की लंबी आयु की कामना करती हैं.

पूजा विधि

स्नान के बाद रेशम के वस्त्र पहनकर शिव जी को दुग्ध स्नान कराएं. इसके बाद उन्हें अक्षत, चंदन, फल आदि चढ़ाएं. पीपल के पेड़ पर भी ये सारी चीजें अर्पित करते हुए 108 बार परिक्रमा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन मौन व्रत करने पर पुण्य मिलता है.

इस मंत्र का करें जाप

सोमवती अमावस्या के दिन इस खास मंत्र मंत्र का जाप करने से विशेष फल मिलेगा.

अयोध्या, मथुरा, माया, काशी कांचीअवन्तिकापुरी, द्वारवती ज्ञेया: सप्तैता मोक्ष दायिका. गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदा सिंधु कावेरी जलेस्मिनेसंनिधि कुरू.

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