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शनि अमावस्या, सूर्य ग्रहण: जानिए कैसे कर सकते हैं पूजा और इन बातों का रखें खास ध्यान

11 अगस्त दिन शनिवार को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारतीय मानक समयानुसार दोपहर 1 बजकर 32 मिनट पर शुरू हो जाएगा और ग्रहण मोक्ष सायं काल 5 बजे होगा

Updated On: Aug 09, 2018 05:13 PM IST

Ashutosh Gaur

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शनि अमावस्या, सूर्य ग्रहण: जानिए कैसे कर सकते हैं पूजा और इन बातों का रखें खास ध्यान

अमावस्या तिथि बहुत मायने रखती है. हिंदू पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष का यह अंतिम दिन होता है. अमावस्या की रात्रि को चंद्रमा घटते-घटते बिल्कुल लुप्त हो जाता है. सूर्य ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाएं केवल अमावस्या तिथि को ही घट सकती हैं. कुल मिलाकर अमावस्या तिथि बहुत महत्वपूर्ण होती है लेकिन धार्मिक रूप से तो अमावस्या और भी खास होती है. स्नान दान के लिए तो यह बहुत ही सौभाग्यशाली तिथि मानी जाती है विशेषकर पितरों की आत्मा की शांति के लिए हवन-पूजा, श्राद्ध, तर्पण आदि करने के लिए तो अमावस्या श्रेष्ठ तिथि होती है.

श्रावणी अमावस्या से पहले दिन शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. सावन शिवरात्रि से अगला दिन श्रावणी अमावस्या का होता है. गर्मी से झुलसते पेड़ों को श्रावण की ऋतु नया जीवनदान देती है और हर ओर हरियाली छा जाती है. इस अमावस्या के तीन दिन बाद ही त्यौहारों का बीजारोपण करने वाला पर्व हरियाली तीज आता है इसलिए यह अमावस्या हरियाली अमावस्या भी कही जाती है. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 2018 में हरियाली अमावस्या 11 अगस्त को शनिवार के दिन है. इसी दिन सूर्य ग्रहण भी लग रहा, साथ इस दिन शनि अमावस्या है .

हरियाली अमावस्या व्रत और पूजा विधि

चूंकि इस अमावस्या पर पेड़-पौधों को नया जीवन प्रदान होता है और पेड़-पौधों से मनुष्य का जीवन सुरक्षित होता है इस कारण वृक्षों की पूजा का हरियाली अमावस्या पर खास महत्व होता है. इस दिन पीपल की पूजा की जाती है. इसके फेरे लिए जाते हैं. मालपूओं का भोग लगाया जाता है. पीपल, बरगद, केला, निंबू, तुलसी आदि का वृक्षारोपण करना भी शुभ माना जाता है. दरअसल वृक्षों की प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के पर्व के रूप में हरियाली अमावस्या को जाना जाता है. इन वृक्षों में देवताओं का वास माना जाता है. पीपल में जहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास बताया जाता है वहीं आंवला में भगवान लक्ष्मीनारायण को विराजमान माना जाता है. इस दिन गेंहू, ज्वार, मक्का आदि की सांकेतिक बुआई भी की जाती है. गुड़ व गेंहू की धानि प्रसाद के रूप में वितरित की जाती है. उत्तर भारत में तो इसे पर्व के रूप में मनाया जाता है.

पौधारोपण के लिए उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपदा, रोहिणी, मृगशिर, रेवती, चित्रा, अनुराधा, मूल, विशाखा, पुष्य, श्रवण, अश्विनी, हस्त आदि नक्षत्र श्रेष्ठ व शुभ फलदायी माने जाते हैं.

सावन अमावस्या पर लग रहा है सूर्य ग्रहण

11 अगस्त दिन शनिवार को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारतीय मानक समयानुसार दोपहर 1 बजकर 32 मिनट पर शुरू हो जाएगा और ग्रहण मोक्ष सायं काल 5 बजे होगा.

इसी दिन साल का तीसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण भी लगेगा. हालांकि यह ग्रहण भारत में नहीं देखा जा सकेगा जिस कारण इसका असर भारत में नहीं पड़ेगा. इसी कारण यहां पर सूतक का विचार भी नहीं किया जाएगा.

यह ग्रहण सावन में पड़ रहा है और साथ शनि अमावस्या का शुभ संयोग भी बन रहा है.  इस ग्रहण काल के समय अगर शिव जी का पूजन किया जाए तो जिन पर शनि की साढ़े साती अथवा ढैया चल रही हो उसकी सभी विपत्ति दूर हो जाएंगी. शनि का और ग्रहण का जिनकी कुंडली में सूर्य और राहु या सूर्य शनि का संबंध हो तो वो अवश्य कर लें.

इस दिन गन्ने के रस, शहद और केसर मिश्रित दूध से शिव जी का पूजन करें. इस दिन शमी वृक्ष का पूजन भी अवश्य करना चाहिए, जिससे सभी रोगों से मुक्ति मिल जाती है.

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