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सूर्य ग्रहण 2018: 13 जुलाई को लग रहा है ग्रहण, गलत प्रभाव से बचने के लिए करें ये उपाय

ग्रहण के दौरान सूर्य और चंद्र के साथ में मौजूद रहने के कारण लोगों की निर्णय क्षमता कम हो जाएगी. आपसी द्वेष बढ़ेंगे. जातियों के बीच टकराव, हिंसक घटनाएं होंगी

Updated On: Jul 13, 2018 08:53 AM IST

Ashutosh Gaur

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सूर्य ग्रहण 2018: 13 जुलाई को लग रहा है ग्रहण, गलत प्रभाव से बचने के लिए करें ये उपाय
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पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने के साथ-साथ अपने सौरमंडल के सूर्य के चारों ओर भी चक्कर लगाती है. दूसरी ओर, चंद्रमा दरअसल पृथ्वी का उपग्रह है और उसके चक्कर लगता है, इसलिए, जब भी चंद्रमा चक्कर काटते-काटते सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तब पृथ्वी पर सूर्य आंशिक या पूर्ण रूप से दिखना बंद हो जाता है. इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है.

इस बार जुलाई में एक नहीं बल्कि दो ग्रहण होने वाले हैं. आषाढ़ महीने की अमावस्या को यानी 13 जुलाई 2018 को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण है. 13 जुलाई को पड़ने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. सूर्य ग्रहण के बाद 27 जुलाई को सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण लगेगा.

कहां-कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण

आकाश मंडल में उपस्थित प्रत्येक ग्रह का प्रभाव पृथ्वी पर होता है इसलिए भले ही यह सूर्य ग्रहण भारत में न दिखे,  लेकिन इसका असर प्रकृति पर जरूर होगा. 13 जुलाई 2018 को होने वाला सूर्य ग्रहण दक्षिण आस्ट्रेलिया और आस्ट्रेलिया के सुदूर दक्षिणी भागों विक्टोरिया, तस्मानिया, प्रशांत और हिंद महासागर में देखा जा सकेगा.

हिंदू पंचांग के अनुसार 13 जुलाई को आषाढ़ मास की अमावस्या पड़ रही है, जिसका विशेष महत्व होता है क्योंकि इस अमावस्या के बाद वर्षा ऋतु आती है. आषाढ़ अमावस्या पर दान और पूर्वजों की आत्मा शांति के लिए गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है.

A partial eclipse of the sun is seen from the "Puerto del Viento" mountain pass in Ronda

सूर्य ग्रहण का समय और सूतक

सूर्य ग्रहण 13 जुलाई 2018 को भारतीय समय के अनुसार सुबह 7 बजकर 18 मिनट से शुरू होगा और 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा. इस बार का सूर्य ग्रहण पुनर्वसु नक्षत्र और हर्षण योग में पड़ेगा. ग्रहणकाल का सूतक 12 घंटे पहले लगता है. लेकिन यह ग्रहण भारत में नहीं दिख रहा इसलिए इसका सूतक मान्य नहीं होगा.

ज्योतिषीय गणना के आधार पर लोगों के ऊपर ग्रहण का प्रभाव अवश्य पड़ता है ग्रहण के समय सूर्य और राहु जिस राशि में और जिन राशियों के साथ संबंध होता और साथ ही जिस नक्षत्र में होता उसको प्रभावित करता है. कुछ राशि और नक्षत्र के लिए ये विशेष शुभ फलदाई भी होता है. लेकिन सभी राशि के जातकों को उपाय करना चाहिए. ग्रहण पर निकलने वाली नकारात्मक शक्ति से गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतनी होगी. मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण वातावरण को अशांत और दूषित करता है. जिससे जीवों और प्रकृति पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है.

अमावस्या तिथि प्रात: 8.17 बजे तक रहेगी

इस दिन अमावस्या तिथि प्रात: 8.17 बजे तक रहेगी. यह ग्रहण कर्क लग्न और मिथुन राशि में हो रहा है. खास बात यह है कि इस दौरान सूर्य और चंद्र दोनों मिथुन राशि में मौजूद रहेंगे और लग्न में बुध और राहु रहेंगे. चूंकि यह ग्रहण कर्क लग्न और मिथुन राशि में हो रहा है इसलिए कर्क लग्न, कर्क राशि, मिथुन लग्न, मिथुन राशि वालों के लिए ग्रहण शुभ नहीं रहेगा.

सूर्य और चंद्र के एक साथ एक ही राशि में रहने से कर्क, मिथुन और सिंह राशि वालों को मानसिक कष्ट होगा. शारीरिक रूप से अस्वस्थ महसूस करेंगे. आर्थिक मामलों में सावधानी रखने की आवश्यकता होगी. अन्य राशि वाले भी ग्रहण के प्रभाव में आएंगे. इनके कार्यों में कुछ समय के लिए विराम लग सकता है, यानी कार्य धीमे हो सकते हैं. आर्थिक परेशानी आएगी. मानसिक रूप से विचलित रहेंगे. किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाएंगे.

solar eclipse

पृथ्वी पर ग्रहण का प्रभाव

सूर्य ग्रहण के कारण पृथ्वी के कुछ जगहों पर तेज बारिश होगी. भूस्खलन, बाढ़, भूकंप, समुद्र में तूफान, आंधी जैसी घटनाएं हो सकती है. अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुछ चौंकाने वाले घटनाक्रम होंगे. जिन देशों के बीच तनाव चल रहे हैं, वे खुलकर विरोध में आ सकते हैं. भारत की बात करें तो यहां किसी बड़े राजनेता को कष्ट, ट्रेन और विमान दुर्घटना की आशंका है.

ग्रहण के दौरान सूर्य और चंद्र के साथ में मौजूद रहने के कारण लोगों की निर्णय क्षमता कम हो जाएगी. आपसी द्वेष बढ़ेंगे. जातियों के बीच टकराव, हिंसक घटनाएं होंगी. किसी भी ग्रहण का प्रभाव 10 दिन पहले से पड़ना शुरू हो जाता है, और ग्रहण के 10 दिन बाद तक रहता है.

इन उपायों  ले मिल सकती है राहत

सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए.

सूर्य मंत्र: ॐ घृणि सूर्याय नम:|| महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बक यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धन्म। उर्वारुकमिव बन्धनामृत्येर्मुक्षीय मामृतात् !!

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