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सावन मास के चंद्र दर्शन पर इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, दूर होंगे सारे कष्ट

माना जाता है शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भगवान शंकर गौरी के समीप होते हैं, इसलिए इस दिन शिवपूजन, रुद्राभिषेक, पार्थिव पूजन और विशेष रूप से चंद्र दर्शन और पूजन अति शुभ माना गया है

FP Staff Updated On: Aug 12, 2018 12:09 PM IST

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सावन मास के चंद्र दर्शन पर इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, दूर होंगे सारे कष्ट

आज यानी 12 अगस्त का दिन बेहद खास है. इसकी वजह यह है कि सावन महीने का चंद्र दर्शन 12 अगस्त को ही पड़ रहा है. हर महीने अमावस्या के बाद चंद्र दिखने पर चंद्र दर्शन मनाया जाता है. शास्त्रों के अनुसार, सावन के महीने में चंद्र दर्शन करना अत्यंत फलदायक होता है.

चंद्रमा को मन और ज्ञान का स्वामी माना जाता है. कुंडली में अशुभ चंद्रमा होने से मानसिक विकार, माता को कष्ट, धन हानि की संभावना रहती है. इस दिन चंद्र दर्शन और पूजन से मानसिक शांति और स्थिरता, धन लाभ में वृद्धि मिलती है.

क्या है चंद्र दर्शन का मुहूर्त?

चंद्र दर्शन का शुभ मुहूर्त 12 अगस्त को शाम 5.30 बजे से लेकर 6.30 तक रहेगा. वहीं चंद्र पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6 से 7 बजे तक रहेगा. बताया जाता है कि चंद्र दर्शन के दिन शुभ मुहूर्त पर पूजा करने से जातक को शुभ फल मिलते हैं. चंद्रमा बुद्धि और ज्ञान का देवता है इसीलिए इस दिन चंद्र दर्शन करने से विद्या का आर्शीवाद प्राप्‍त होता है.

क्या है पूजा विधि?

कहते हैं हर त्योहार पर पूजा पूरे विधि-विधान से करनी चाहिए, नहीं तो कई बार उसका उल्टा फल भी मिल जाता है. ऐसे चंद्र दर्शन के दिन भी पूजा के विधि विधान का विशेष तौर से ख्याल रखें. मान्यताओं के मुताबिक, संध्या के समय चंद्र देव कादशोपचार पूजन करें. गौघृत का दीपक करें, कर्पूर जलाकर धूप करें, सफेद फूल, चंदन, चावल और इत्र चढ़ाएं, खीर का भोग लगाएं. चंद्रमा को पंचामृत से अर्घ्य दे और सफेद चंदन की माला से 108 बार इस विशिष्ट मंत्र जपें. पूजन के बाद का भोग किसी स्त्री को भेंट करने के लिए कहा गया है.

माना जाता है शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भगवान शंकर गौरी के समीप होते हैं, इसलिए इस दिन शिवपूजन, रुद्राभिषेक, पार्थिव पूजन और विशेष रूप से चंद्र दर्शन और पूजन अति शुभ माना गया है.

इस मंत्र का करें जाप

चंद्र दर्शन के दिन पूजा के बाद इस विशेष मंत्र का जाप करने से हर कष्ट दूर हो जाते हैं और मन को शांति प्राप्त होती है.

मंत्र : ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृत तत्वाय धीमहि, तन्नो चन्द्र: प्रचोदयात॥

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