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सच्ची खुशी पाने के लिए सच्चे रास्ते के ज्ञान की जरूरत

सच्ची खुशी पाना इतना भी कठिन नहीं है जितना हम सोचते हैं. स्थाई खुशी हमें अवश्य मिल सकती है, यदि हम उसे सही स्थान पर खोजें तो

Updated On: Dec 23, 2017 04:42 PM IST

Sant Rajinder Singh Ji

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सच्ची खुशी पाने के लिए सच्चे रास्ते के ज्ञान की जरूरत

आज हममें से हरेक खुशी और शांति की तलाश कर रहा है. यह खोज सर्वव्यापी है. आखिरकार दुःखी तो कोई भी नहीं रहना चाहता. लोग अलग-अलग तरीकों से खुशियां ढूंढने की कोशिश करते हैं.

कुछ इसे धन-दौलत और दुनियावी चीजों में ढूंढते हैं. कुछ इसे यश और प्रसिद्धी में पाना चाहते हैं. कुछ इसे सांसारिक रिश्तों-नातों में तलाश करते हैं. कुछ लोग फिल्म, संगीत, सांस्कृतिक गतिविधियां, टी.वी. और शारीरिक भोगो-रसों जैसे दुनियावी मनोरंजनों में खुशियां ढूंढने की कोशिश करते हैं. अन्य लोग खेलकूद देखकर या उनमें भाग लेकर खुशियों की तलाश करते हैं. कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो शराब और अन्य नशीले पदार्थों के जरिए खुशियां पाना चाहते हैं.

भौतिक वस्तुओं में खुशी ढूंढने की कोशिश बेकार

अधिकतर लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति के द्वारा ही खुशियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं. हमें एक कार खरीदने की इच्छा हो सकती है; हमें एक मकान खरीदने की इच्छा हो सकती है; हमें इतिहास या विज्ञान का अध्ययन करने की इच्छा हो सकती है; या हमें इस संसार की किसी भी वस्तु की इच्छा हो सकती है. हमारी कोशिश यही होती है कि हम अपनी इच्छाओं को पूरा कर पाएं. हमारा जीवन ऐसे ही गुजरता चला जाता है, जिसमें हम एक के बाद एक अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने में ही लगे रहते हैं.

समस्या यह है कि हमारी इच्छाओं का कोई अंत ही नहीं होता. जब हमारी एक इच्छा पूरी हो जाती है, तो हमारे अंदर दूसरी पैदा हो जाती है. जब वो भी पूरी हो जाती है, तो हमारे अंदर कोई और इच्छा उत्पन्न हो जाती है और उसके बाद फिर कोई अन्य इच्छा जाग जाती है. इस तरह हमारा जीवन गुजरता चला जाता है. यह सच है कि आधुनिक संस्कृति हमारे अंदर नई-नई इच्छाओं को पैदा करती है. हम पोस्टरों, होर्डिंग्स, टी.वी. और रेडियो पर रोज नए-नए विज्ञापन देखते हैं. विज्ञापनकर्ता हमें सिखाते हैं कि हमारे लिए फलां इलैक्ट्रिाॅनिक उपकरण, या फलां फैशन के कपड़े, या फलां कार बहुत ही जरूरी है. वो हमें यकीन दिलाते हैं कि अगर हम तुरंत इन चीजों को खरीद नहीं लेते, तो इसका मतलब हममें और हमारे जीवन में कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर है.

rajinder singh ji

संत राजिंदर सिंह जी

संसार की खुशियां क्षणिक

यदि हम इन चीजों पर विचार करें, तो पाएंगे कि ये हमें वो स्थाई खुशियां नहीं देतीं जिनका हमसे वादा किया जाता है. हम थोड़े समय के लिए जरूर इनसे खुशी हासिल करते हैं, लेकिन इनके खो जाने या नष्ट हो जाने से, या रिश्ते-नातों के टूट जाने या दूर हो जाने से, हमें बहुत ही दुःख और पीड़ा सहन करनी पड़ती है. जीवन में किसी ना किसी मोड़ पर हमें यह एहसास अवश्य होता है कि बाहरी संसार की खुशियां क्षणिक हैं, यह एक अस्थाई भ्रम है. इस दुनिया की प्रत्येक वस्तु को एक ना एक दिन नष्ट अवश्य होना है. अंततः हमें भी एक दिन इस संसार से जाना ही होगा और हम अपनी समस्त प्रिय वस्तुओं को यहीं पीछे छोड़ जाएंगे.

स्थाई खुशी के लिए सही लक्ष्य की जरूरत

चूंकि हम इंसानों को इस तरह बनाया गया है कि हमारा ध्यान अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने में ही लगा रहता है, इसीलिए आवश्यकता है सही प्रकार की इच्छा रखने की. सबसे पहले तो हमें एक लक्ष्य तय कर लेना चाहिए और सही लक्ष्य है प्रभु को पाना, परमात्मा में अपनी आत्मा का मिलाप करवाना. हम अपनी अनमोल सांसों को दुनियावी इच्छाओं की पूर्ति में ही जाया कर देते हैं. अंत में हमें महसूस होता है कि इनसे हमें वो स्थाई खुशियां, प्रेम और संतोष नहीं मिला जो हम असल में पाना चाहते थे.

युगों-युगों से इस संसार में आने वाले संत-महापुरुष और दार्शनिक हमें यही बताते चले आए हैं कि सच्ची खुशी हमें अवश्य मिल सकती है लेकिन उसे हम केवल अपने अंतर में पा सकते हैं. अगर हम बाहरी दुनिया में उसे ढूंढेगे, तो हमें लगातार निराशा ही हाथ लगेगी. यदि हम इस भौतिक संसार में संपूर्णता की तलाश करेंगे, तो वो हमें कभी भी नहीं मिलेगी.

ख़ुशियों का केवल एक ही स्रोत स्थाई है, जो हवा, आग, पानी, या मिट्टी से नष्ट नहीं हो सकता. वो हमसे ना तो इस जीवन में छीना जा सकता है और ना ही शारीरिक मृत्यु के बाद. सच्ची व स्थाई खुशी केवल परमात्मा ही है. यदि हम अपने अंतर में सच्चे आत्मिक स्वरूप का अनुभव कर लेंगे, तो हमें इतनी अधिक खुशियां और प्रेम मिलेगा, जो इस संसार की किसी भी इच्छा की पूर्ति से हमें नहीं मिल सकता.

(लेखक सावन कृपाल रूहानी मिशन के प्रमुख हैं)

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