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उत्तर प्रदेश का ऐसा मंदिर जहां होती है रावण की पूजा

इस मंदिर की स्थापना पंडित बलदेव प्रसाद ने लगभग 100 साल पहले की थी

Bhasha Updated On: Sep 29, 2017 07:44 PM IST

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उत्तर प्रदेश का ऐसा मंदिर जहां होती है रावण की पूजा

आम भारतीयों के मन में वैसे तो रावण एक खलनायक की तरह है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बदायूं में एक मंदिर ऐसा भी है जहां लंकेश की विधिवत पूजा की जाती है.

दशहरा पर बुराई के प्रतीक को जलाने की तैयारियों की धूम के बीच यह एक दिलचस्प तथ्य है. बदायूं शहर के साहूकार मुहल्ले में रावण का बहुत प्राचीन मंदिर है. हालांकि दशहरे के दिन इस मंदिर के कपाट नहीं खोले जाते.

इस मंदिर की स्थापना पंडित बलदेव प्रसाद ने लगभग 100 साल पहले की थी. बलदेव रावण को प्रकाण्ड विद्वान और अद्वितीय शिवभक्त मानकर उसकी पूजा करते थे. उनकी देखादेखी कई और लोगों ने भी मंदिर आकर पूजा शुरू कर दी.

उत्तर भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां रावण की पूजा होती है 

इस मंदिर में रावण की आदमकद प्रतिमा स्थापित है, जिसके नीचे शिवलिंग प्रतिष्ठापित किया गया है. मंदिर के दाईं तरफ भगवान विष्णु की प्रतिमा है. मंदिर में रावण की प्रतिमा को भगवान शिव की आराधना करते हुए स्थापित किया गया है.

इस मंदिर में रावण के अतिरिक्त जितने भी देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं, उनका आकार रावण की प्रतिमा से काफी कम है. पूरे उत्तर भारत में सम्भवतः यही एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां रावण की पूजा होती है.

मंदिर के पास रहने वाली पुजारिन रश्मि वर्मा ने बताया कि लोग रावण की पूजा अक्सर चोरी-छुपे ही करते हैं. चूंकि भारतीय संस्कृति में रावण को बुराई का प्रतीक माना गया है, शायद इसलिए वे ऐसा करते हैं.

विजय दशमी के दिन नहीं होती रावण की पूजा 

उन्होंने बताया कि विजय दशमी के दिन रावण के इस मंदिर के कपाट पूरी तरह बंद रहते हैं. रावण को आदर्श मानने वाले लोग इस दिन अपने घर में कोई खुशी भी नहीं मनाते.

रश्मि ने कहा कि भारत एक धर्म प्रधान देश है. देश के अलग-अलग प्रान्तों में कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं. पूजा भले ही अलग-अलग देवी देवताओं की होती हो, लेकिन पूजा दरअसल देवत्व गुणों की ही होती है.

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