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दोपहर 2 बजकर 21 मिनट के बाद ऐसे करें नवमी की पूजा, पुनर्वसु नक्षत्र में मिलेगा खास फल

अष्‍टमी और नवमी एक ही दिन पड़ रही है और वामन पुराण में इस तरह की नवमी का खास महत्व बताया गया है

FP Staff Updated On: Mar 24, 2018 07:37 PM IST

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दोपहर 2 बजकर 21 मिनट के बाद ऐसे करें नवमी की पूजा, पुनर्वसु नक्षत्र में मिलेगा खास फल

भगवान राम का जन्म यानी रामनवमी हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है. इस बार नवरात्रि में एक तिथि का क्षय हो गया है. नवमी तिथि का लोप होने के कारण पंचांग में अष्टमी को ही नवमी मनाई जाएगी.

साल 2018 में 24 मार्च को ही 10 बजकर 6 मिनट पर सुबह अष्टमी शुरू हो चुकी है . 25 मार्च को 8 बजकर 3 मिनट तक रहेगी. 26 मार्च के सूर्योदय के समय दशमी हो शुरू हो जाएगी. नवमी तिथि 25 तारीख को सूर्योदय के बाद शुरू होगी और 26 को सूर्योदय के पहले ही खत्म हो जाएगी. इसलिए इस नवरात्रि को नवमी तिथि नहीं होगी.

वामन पुराण में इस तरह की नवमी का जिक्र मिलता है. कहा गया है, चैत्र शुक्ला तु नवमी पुनर्वसु युता यदि। सैव मध्याह्नयोगेन महापुण्यफल प्रदा. कहा जाता है कि ये रामनवमी काफी पुण्यफल देने वाली होती है. इस साल 25 मार्च को 8 बजकर 3 मिनट के बाद नवमी तिथि लग जाएगी और 2 बजकर 21 मिनट से पुनर्वसु नक्षत्र उदित होगा, जिससे रामनवमी का पूजन करने के लिए 2 बजकर 21 मिनट के बाद का समय बहुत ही उत्तम रहेगा.

राम नवमी पर पूरे दिन का उपवास करके भगवान राम के जन्म दिवस को मनाने और सूर्यास्त के बाद भोजन करने का प्रावधान है. भगवान श्रीराम को प्रसाद के रूप में पंचामृत, श्री खंड, खीर या हलवे का भोग लगाया जाता है.

रामनवमी पूजा मुहूर्त : प्रात: 11:14 से दोपहर 13:41 तक अवधि: 2 घंटे 26 मिनट राम नवमी के दिन पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय: 12:27

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