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Raksha Bandhan 2018: जानें क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, समय का रखें खास ध्यान

अलग-अलग स्थान पर अलग-अलग मान्यताएं है. लेकिन अधिकतर जगह टीका करके भाई की आरती उतारी जाती है और उसकी दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है

Updated On: Aug 24, 2018 09:31 AM IST

Ashutosh Gaur

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Raksha Bandhan 2018: जानें क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, समय का रखें खास ध्यान
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श्रावण मास की पूर्णिमा को भाई-बहन का त्योहार रक्षा बंधन मनाया जाता है. इस बार  रक्षा बंधन पर भद्रा नहीं होने के कारण विशेष संयोग भी बन रहा है. इस बार रक्षा बंधन का पर्व पूरे दिन मनाया जाएगा. ज्योतिषिय गणना के अनुसार इस बार 11 घंटे तक राखी बांधने का समय है. कई स्थान पर राखी बांधने तक भाई और बहन दोनों उपवास रखते हैं. राखी बांधने के बाद बहन भाई को मिठाई खिलाती है और आशीर्वाद देती है, तो भाई अपनी बहन की सुरक्षा  का वचन देता है.

अलग-अलग स्थान पर अलग-अलग मान्यताएं है. लेकिन अधिकतर जगह टीका करके भाई की आरती उतारी जाती है और उसकी दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है. थाली में रखे पैसों को भाई पर न्योछावर किया जाता है और भाई-बहन एक दूसरे को मिठाई खिलाते हैं.

रक्षा बंधन मुहूर्त

इस वर्ष रक्षा बंधन 26 अगस्त  दिन रविवार को मनाया जाएगा .

अनुष्टान समय - 05:59 से 17:25 (26 अगस्त 2018)

अपराह्न मुहूर्त - 13:39 से 16:12 (26 अगस्त 2018)

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ - 15:16 बजे (25 अगस्त 2018)

पूर्णिमा तिथि समाप्त - 17:25 बजे (26 अगस्त 2018)

राहुकाल सायं काल 5:14 - 6:49 तक

राहुकाल में राखी बांधना वर्जित है

भाई-बहन के प्रेम का ये त्योहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन एक और जहां बहनें अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती हैं वहीं भाई भी उनकी रक्षा करने का वचन देता है.

मंत्र

येन बद्धो बलि: राजा दानवेंद्रो महाबल:.

तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल..

अर्थ

जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बांधता हूं. हे रक्षे (राखी), तुम अडिग रहना. अपने रक्षा के संकल्प से कभी भी विचलित मत होना.

पौराणिक कथा

राजा बलि ने जब 100 यज्ञ पूर्ण कर स्वर्ग का राज्य छीनने का प्रयास किया तो देवराज इंद्र ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की. भगवान, वामन अवतार लेकर राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंचे. भगवान ने तीन पग में आकाश, पाताल और धरती नापकर राजा बलि को रसातल में भेज दिया. तब राजा बलि ने अपनी भक्ति से भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया. तब माता लक्ष्मी ने राजा बलि के पास जाकर उन्हें रक्षासूत्र बांधकर अपना भाई बनाया और भेंट में अपने पति को साथ ले आईं. उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी.

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