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RakshaBandhan 2018: संतों के लिए सबसे बड़ा त्योहार है ये दिन, मन और आत्मा की शुद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ

श्रावणी उपाकर्म के दिन इस मुहूर्त पर विधि विधान से पूजा करने से मन और आत्मा की शुद्धि होती है

Updated On: Aug 24, 2018 06:43 PM IST

Ashutosh Gaur

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RakshaBandhan 2018: संतों के लिए सबसे बड़ा त्योहार है ये दिन, मन और आत्मा की शुद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ

रक्षाबंधन का पर्व एक ओर जहां भाई-बहन के अटूट रिश्ते को राखी की डोर में बांधता है, वहीं यह वैदिक ब्राह्मणों को साल भर में आत्मशुद्धि का अवसर भी देता है. वैदिक परंपरा अनुसार वेदपाठी ब्राह्मणों के लिए श्रावण मास की पूर्णिमा सबसे बड़ा त्योहार है. इस दिन को श्रावणी उपाकर्म के रूप में मनाते हैं और यजमानों के लिए कर्मकांड यज्ञ, हवन आदि करने की जगह खुद अपनी आत्मशुद्धि के लिए अभिषेक और हवन करते हैं. यह उपाकर्म द्विज के शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि करता है.

वैदिक काल से द्विज जाति पवित्र नदियों और तीर्थ के तट पर आत्मशुद्धि का यह उत्सव मनाती आ रही है, पर वर्तमान समय में ब्राह्मण और वैदिक श्रावणी की परंपरा को भूलते जा रहे हैं. इस कर्म में आंतरिक और बाह्य शुद्धि गोबर, मिट्टी, भस्म, अपामार्ग, दूर्वा, कुशा और मंत्रों के जरिए की जाती है.

पंचगव्य महाऔषधि है

दूध, दही, घृत, गोबर, गोमूत्र जैसे पंचगव्य से प्राशन कर शरीर के अंतःकरण को शुद्ध किया जाता है. सनातन धर्म में दशहरा क्षत्रियों का प्रमुख पर्व है. दीपावली वेश्यों और होली अन्य जनों के लिए विशिष्ठ महत्व का पर्व है. रक्षाबंधन अर्थात् श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाने वाला श्रावणी उपाकर्म ब्राह्मणों और द्विजों का सबसे बड़ा पर्व है.

श्रावणी उपाकर्म उत्सव में वैदिक विधि से हेमादिप्राक्त, प्रायश्चित संकल्प, सूर्याराधन, दसविधि स्नान, तर्पण, सूर्योपस्थान, यज्ञोपवीत धारण, प्राणायाम, अग्निहोत्र और ऋषि पूजन किया जाता है. उनके साथ ही सामूहिक मंत्रोच्चार करते हुए सभी वेदपाठियों द्वारा शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि की जाती है. श्रावणी उपाकर्म उत्सव का समापन पूर्णाहुति, हवन यज्ञ और भंडारे के साथ होता है.

श्रावणी उपाकर्म का महत्व

इस दिन पुराने यज्ञोपवीत की जगह नवीन यज्ञोपवीत धारण करना चाहिए श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को श्रावणी उत्सव अवश्य करना चाहिए. इसमें दसविधि स्नान करने से आत्मशुद्धि होती है और पितरों के तर्पण से उन्हें भी तृप्ति होती है. ब्राह्मणों को इस कर्म को नहीं त्यागना चाहिए.

श्रावणी उपाकर्म पूजन का मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ - 15:16 बजे (25 अगस्त 2018)

पूर्णिमा तिथि समाप्त - 17:25 बजे (26 अगस्त 2018) प्रातः 6:07-7:11 तक प्रातः 8:15-9:15 तक अपराह्न 12:04-12:55 तक

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