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Mahalaya Amavasya, ‪Pitru Paksha 2017: खत्‍म हो रहे हैं श्राद्ध, जानिए क्या है पूर्वजों को श्रद्धाजंलि देने का समय

हर साल भद्रपद शुक्लपक्ष पूर्णिमा से लेकर अश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के काल को पितृपक्ष या श्राद्ध पक्ष कहा जाता है

FP Staff Updated On: Sep 18, 2017 12:59 PM IST

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Mahalaya Amavasya, ‪Pitru Paksha 2017: खत्‍म हो रहे हैं श्राद्ध, जानिए क्या है पूर्वजों को श्रद्धाजंलि देने का समय

विसर्जन का शाब्दिक अर्थ हैं पूर्ण होना, समापन या अंत. इसी प्रकार पितृविसर्जन मूलतः पितृपक्ष की समापन बेला हैं. मान्यता है कि पितृपक्ष में पितृ धरती पर उतरते हैं और पितृविसर्जन यानि श्राद्ध पक्ष की अमावस्या को पितृ हमसे विदा हो जाते हैं. कहते हैं कि जो अपने अस्तित्व को सम्मान देकर पितृ को प्रतीक स्वरूप अन्न जल प्रदान करता है, उससे प्रसन्न होकर पितृ सहर्ष शुभाशिष प्रदान कर अपने लोक में लौट जाते हैं.

पितृ विसर्जन का समय

पितृ विसर्जन का समय 19 सितम्बर, 2017 को दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से शुरू होगा क्‍योंक‍ि इसी समय से अमावस्‍या की शुरुआत होगी. इसके बाद 20 सितम्बर, 2017 को सुबह 10 बजकर 59 मिनट तक अमावस्‍या रहेगी. ऐसे में प‍ितरों को व‍िदा करने यानी क‍ि व‍िसर्जन का ये सही समय होगा. व‍िदाई के समय सभी प‍ितरों से हाथ जोड़कर अनजाने में हुई भूल की क्षमा याचना करना मत भूलें.

शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्ध करने से व्यक्ति को अपने पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. जिससे घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है. मान्यता है कि अगर पितृ रुठ जातें है तो व्यक्ति को जीवन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. पितरों की अशांति के कारण धन हानि और संतान पक्ष से भी समस्यओं का सामना करना पड़ता है.

पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन धरती पर पधारे पितरों को याद करके उनकी विदाई की जाती है. पूरे पितृ पक्ष में पितरों को याद न किया गया हो तो अमावस्या को उन्हें याद करके दान करने और गरीबों को भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है.

श्राद्ध का महत्व

ब्रह्मचारीजी ने बताया कि वेदों में बताए गए विधान के अनुसार शाम को जप, हवन एवं तर्पण अवश्य करना चाहिए. इसलिए ब्रह्माजी ने श्रृष्टि निर्माण में पितृलोक कस निर्माण किया है. पितृ आराधना का समय निर्धारित किया है. पितृ पक्ष में गया श्राद्ध, पार्वण श्राद्ध, ब्रम्हकपाली श्राद्ध किया जाता है. हम मनुष्य को लोक में पितरों के नियम से जो भी श्राद्ध और कर्म करते हैं वो हमारे पितरों को अनंत गुना होकर मिलता है और वो हमें आर्शीवाद प्रदान करते हैं. घर में किया गया तर्पण एक गुना व पवित्र पुनीत नदियों नर्मदा गंगा आदि में किया गया तर्पण अनंत गुना होता है.

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