विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

नवरात्र 2017: तीसरे दिन ऐसे करें चंद्रघंटा माता की पूजा

इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है

FP Staff Updated On: Sep 22, 2017 07:53 PM IST

0
नवरात्र 2017: तीसरे दिन ऐसे करें चंद्रघंटा माता की पूजा

मां दुर्गा के नौ रूपों में तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा होती है. दुर्गा का तीसरा रूप चंद्रघंटा है. इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है. इनके शरीर का रंग सोने के समान बहुत चमकीला है और इनके दस हाथ हैं.

वे खड्ग और अन्य अस्त्र-शस्त्र से विभूषित हैं. सिंह पर सवार दुष्‍टों के संहार के लिए हमेशा तैयार रहती हैं. इसके घंटे सी भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य और राक्षस कांपते रहते हैं.

पूजा का समय 

शनिवार को पूजा का समय सुबह 6 बजे से दिन के 10.55 बजे तक पूजा का मुहूर्त है. ऐसे भक्त जो नियमानुसार पूजा करते हैं वह सुबह 10.55 तक पूजा की शुरुआत कर सकते हैं. बाकि भक्त दिन भर पूजा कर सकते हैं.

इनकी पूजन विधि इस प्रकार है 

तीसरे दिन की पूजा का विधान भी लगभग उसी प्रकार है जो दूसरे दिन की पूजा का है. इस दिन भी आप सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित देवी-देवता, तीथरें, योगिनियों, नवग्रहों, दशदिक्पालों, ग्राम एवं नगर देवता की पूजा अराधना करें. फिर माता के परिवार के देवता, गणेश, लक्ष्मी, विजया, कार्तिकेय, देवी सरस्वती, एवं जया नामक योगिनी की पूजा करें फिर देवी चन्द्रघंटा की पूजा अर्चना करें. चन्द्रघंटा की मंत्र - या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां की उपासना का मंत्र  पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

देवी पूजा का महत्‍व  नवरात्रि में तीसरे दिन इसी देवी की पूजा का महत्व है. इस देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं. दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाई देने लगती हैं. इन क्षणों में साधक को बहुत सावधान रहना चाहिए. इस देवी की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi