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नवरात्र 2017: चौथे दिन ऐसे करें मां कुष्मांडा की पूजा

ज्योतिष में मां कुष्मांडा का संबंध बुध ग्रह से है

Updated On: Sep 23, 2017 07:45 PM IST

FP Staff

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नवरात्र 2017: चौथे दिन ऐसे करें मां कुष्मांडा की पूजा

नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है. आदि शक्ति के चौथे स्वरूप का नाम देवी कुष्मांडा है. इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है. संस्कृत भाषा में कुष्मांडा का अर्थ है कुम्हड़े. मां को कुम्हड़े की बलि सबसे ज्यादा प्रिय है. इसलिए इन्हें कुष्मांडा देवी कहा जाता है. मां कुष्मांडा देवी की आराधना से रोग-शोक समाप्त हो जाते हैं. इन्हें पापों की विनाशिनी कहा जाता है.

कुष्मांडा देवी कौन हैं?

ये नवदुर्गा का चौथा स्वरुप हैं. अपनी हल्की हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कुष्मांडा पड़ा. ये अनाहत चक्र को नियंत्रित करती हैं. मां की आठ भुजाएं हैं इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहते हैं. ज्योतिष में मां कुष्मांडा का संबंध बुध ग्रह से है.

पूजा का समय 

रविवार को पूजा का समय सुबह 7 बजे से दिन के 11.20 बजे तक पूजा का मुहूर्त है. ऐसे भक्त जो नियमानुसार पूजा करते हैं वह सुबह 11.20 तक पूजा की शुरुआत कर सकते हैं. बाकि भक्त दिन भर पूजा कर सकते हैं.

क्या है देवी कुष्मांडा की पूजा विधि?

हरे कपड़े पहनकर मां कुष्मांडा का पूजन करें. पूजन के दौरान मां को हरी इलाइची, सौंफ और कुम्हड़ा अर्पित करें. इसके बाद उनके मुख्य मंत्र 'ऊं कुष्मांडा देव्यै नमः' का 108 बार जाप करें. चाहें तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं.

उपासना का मंत्र 

या देवी सर्वभूतेषू मां कुष्मांडा रूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां कुष्मांडा का विशेष प्रसाद

ज्योतिष के जानकारों की मानें तो मां को उनका उनका प्रिय भोग अर्पित करने से मां कुष्मांडा बहुत प्रसन्न होती हैं. मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं. इसके बाद प्रसाद को किसी ब्राह्मण को दान कर दें और खुद भी खाएं. इससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय क्षमता भी अच्छी हो जाएगी.

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