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नवरात्रि 2018: दूसरे दिन ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, सभी कष्टों से मिलेगी मुक्ति

जो लोग पूरी श्रद्धा भाव के साथ देवी की भक्ति करते हैं उनके अंदर तप, त्याग,वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है.

Updated On: Mar 19, 2018 11:21 AM IST

FP Staff

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नवरात्रि 2018: दूसरे दिन ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, सभी कष्टों से मिलेगी मुक्ति

18 मार्च से नवरात्र शुरू हो चुके है. नवरात्र के नौ दिन आदिशक्ति के नौ रूपों को समर्पित होते हैं. नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा होती है तो वहीं दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा की जाती है. ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली. इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ होता है तप जैसा आचरण करने वाली.

इनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है. भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए देवी ने कठिन तपस्या की थी. एक हजार साल तक इन्होंने केवल कंद-मूल खाकर बिताए. कई दिनों तक कठिन व्रत रखे और वर्षा और धूप सही. इसके बाद कई वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं. इसी कारण इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा. एक वक्त ऐसा भी आया जब इन्होंने पत्ते खाना भी छोड़ दिया जिसके कारण इनका नाम अपर्णा पड़ा.

बताया जाता है कि देवी का ये स्वरूप अनंत फल देने वाला है. जो लोग पूरी श्रद्धा भाव के साथ देवी की भक्ति करते हैं उनके अंदर तप, त्याग,वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है.

ब्रह्मच्रारिणी मां दुर्गा का दूसरा रूप है. उनके नाम का अर्थ है ब्रह्मचर्य का पालन करने वाली. उन्होंने अपने हाथ में कमंडल धारण किया है

ब्रह्मच्रारिणी मां दुर्गा का दूसरा रूप है. उनके नाम का अर्थ है ब्रह्मचर्य का पालन करने वाली. उन्होंने अपने हाथ में कमंडल धारण किया है

क्या है महत्व

मान्यता है कि माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है. जिससे भक्तों का जीवन सफल हो जाता है और किसी भी बाधा का सामना करने के लिए उनमें शक्ति आ जाती है. ज्ञान और वैराग्य देने वाली मां ब्रह्मचारिणी कठिन समय में भक्तों की रक्षा करती है.

ब्रह्मचारिणी मंत्र

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु , देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा .

पूजा विधि

ब्रह्मचारिणी देवी को पूजा में फूल, अक्षत, रोली, चंदन अर्पण किया जाता है. इसके बाद उन्हें दूध,दही,घी, मधु से स्नान कराया जाता है. इसके बाद देवी को पिस्ते से बनी मिठाई का भोग लगाया जाता है. कहा जाता है जो लोग सच्चे मन से मां की आराधना करते हैं उनका मन हमेशा शांत रहता है और उन्हें किसी बात का डर नहीं सतात.

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