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नवरात्र 2018: क्यों होती है पहले दिन देवी शैलपुत्री की पूजा, मिलते हैं कई लाभ

मान्यता है कि शैलपुत्री की पूजा से व्यक्ति को सुख, सुविधा, माता, घर, संपत्ति, में लाभ मिलता है

Updated On: Mar 17, 2018 02:08 PM IST

FP Staff

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नवरात्र 2018: क्यों होती है पहले दिन देवी शैलपुत्री की पूजा, मिलते हैं कई लाभ

चैत्र नवरात्र की शुरुआत रविवार 18 मार्च से हो रही है जो अगले 9 दिन, 25 मार्च तक मनाई जाएगी. नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के बाद नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है.

क्यों करते हैं घट स्थापना

धर्मशास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है. धारणा है कि कलश के मुख में विष्णुजी का निवास, कंठ में रुद्र और मूल में ब्रह्मा स्थित होती हैं. साथ ही ये भी मान्यता है कि कलश के मध्य में दैवीय मातृशक्तियां निवास करती हैं. इसलिए नवरात्र के शुभ दिनों में घट स्थापना की जाती है.

कौन हैं देवी शैलपुत्री

देवी शैल पुत्री का वर्णन हमें ब्रह्म पुराण में मिलता है. पुराण के अनुसार चैत्र प्रतिपदा के प्रथम सूर्योदय पर ब्रह्मा ने संसार की रचना की थी. माना जाता है कि इसी दिन श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था.

नवरात्र की प्रथम देवी शैलुपुत्री मानव मन पर अपनी सत्ता रखती हैं. उनका चंद्रमा पर भी आधिप्तय माना जाता है. शैलपुत्री पार्वती का ही रूप हैं. पर्वतराज हिमालय के घर में जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है.

क्यों होती है पहले दिन इनकी पूजा

कथा है कि देवी पार्वती शिव से विवाह के पश्चात हर साल नौ दिन अपने मायके यानी पृथ्वी पर आती थीं. नवरात्र के पहले दिन पर्वतराज अपनी पुत्री का स्वागत करके उनकी पूजा करते थे इसलिए नवरात्र के पहले दिन मां के शैलपुत्री रुप की पूजा की जाती है.

यह भी पढ़ें- नवरात्रि 2018: जानिए क्या है कलश स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त और पूजन विधि

श्वेतवर्ण शैलपुत्री के सर पर सोने के मुकुट में त्रिशूल सुशोभित है. इनके दाएं हाथ में त्रिशूल, बाएं हाथ में कमल सुशोभित है.

मान्यता है कि शैलपुत्री की पूजा से व्यक्ति को सुख, सुविधा, माता, घर, संपत्ति, में लाभ मिलता है. मनोविकार दूर होते हैं. इन्हें सफेद फूल चढ़ाएं, गाय के घी का दीपक जलाएं. दूध-शहद और खोए की मिठाई का भोग लगाएं. इस मंत्र का जाप करें.

वंदे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्ध-कृत-शेखरम्. वृषारुढाम् शूलधराम् शैलपुत्रीं यशस्विनीम्.

शैलपुत्री यानी पहाड़ों की पुत्री. मां दुर्गा के नौ रूपों में यह पहला रूप है

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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

जिन घरों में नवरात्रि पर कलश-स्थापना (घटस्थापना) होती है उनके लिए शुभ मुहूर्त 18 मार्च को प्रातः 07 बजकर 35 मिनट से लेकर 3 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. इस दौरान घटस्थापना करना सबसे अच्छा होगा. वसंत नवरात्रि में कई शुभ संयोग बन रहे हैं. नवरात्रि के दिन से हिन्दू नव वर्ष प्रारम्भ होता है. इस दिन रविवार है साथ ही सर्वार्थसिद्ध योग भी बन रहा है. इस दिन जो वार होता उसी का स्वामी वर्ष का राजा होता है, अतः इस वर्ष राजा सूर्य है.

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