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नवरात्रि 2018: जानिए दशमी के दिन क्या है सिंदूर खेला का महत्व

दशमी के दिन सिंदूर खेला को सुहाग की लंबी आयु की कामनाओं का प्रतीक भी माना जाता है

Updated On: Oct 17, 2018 03:03 PM IST

FP Staff

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नवरात्रि 2018: जानिए दशमी के दिन क्या है सिंदूर खेला का महत्व
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नवरात्रि का त्योहार जारी है. आज यानी बुधवार को देशभर में महाअष्टमी मनाई जा रही है. इसके दो दिन बाद दशमी है. बंगाल में इस दिन सिंदूर खेलने की परंपरा है. बंगाल के लोग दशमी के दिन दुर्गा मां के विसर्जन से पहले जमकर सिंदूर खेलते हैं और अगले साल फिर से आने की प्रार्थना करते हैं. इसे सिंदुर खेला के नाम से जाना जाता है.

ऐसा माना जाता है कि दुर्गा पूजा के समय मां दुर्गा 10 दिनों के लिए अपने मायके आती हैं. नवरात्रि के दौरान 9 दिनों तक उनकी पूजा अराधना होती है. इस दौरान जगह-जगह उनके पंडाल आर्कषक रूप से बनाए जाते हैं जिन्हें लोग दूर-दूर से देखने आते हैं.

9 दिनों तक मां दुर्गा की सेवा करने के बाद दसवें दिन यानी दशमी को लोग उन्हें सजा धजा कर सिंदूर लगाकर उन्हें ससुराल के लिए विदा करते है. इसलिए इस दिन शादी शुदा औरतों में सिंदूर खेलने की परंपरा है. दशमी के दिन सिंदूर खेला को सुहाग की लंबी आयु की कामनाओं का प्रतीक भी माना जाता है.

कैसे किया जाता है मां दुर्गा को विदा?

दशमी के दिन मां दुर्गा को विसर्जन से पहले सजा धजा कर सिंदूर लगाया जाता है. फिर उसके बाद उन्हें मिठाई का भोग लगाया जाता है. फिर शादी शुदा औरतें आपस में सिंदूर खेलती हैं और अपेन पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करतीं हैं. इसके बाद मां दुर्गा को विसर्जन के लिए ले जाया जाता है. लोग ढाक की ताल पर नाचते झूमते मां दुर्गा को विदाई देते हैं और अगले साल फिर से आने की प्रार्थना करते हैं.

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