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Navratri 2018: नवरात्र के दूसरे दिन ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

बताया जाता है कि देवी का ये स्वरूप अनंत फल देने वाला है. जो लोग पूरी श्रद्धा भाव के साथ देवी की भक्ति करते हैं उनके अंदर तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है

Updated On: Oct 11, 2018 03:56 PM IST

FP Staff

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Navratri 2018: नवरात्र के दूसरे दिन ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

आज यानी गुरुवर को नवरात्र का दूसरा दिन है. इस दिन मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप की पूजा की जाती है. माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री हैं. इन्होंने देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की. मान्यता है कि भगवती ने एक हजार वर्षों तक फलों का सेवन कर तपस्या की थी. इसके बाद तीन हजार वर्षों तक पेड़ों की पत्तियां खाकर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया.

इसके फलस्वरूप यह देवी भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्‍‌नी बनी. देवी की इस कठिन तपस्या के कारण ही इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया. ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली. इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ होता है तप जैसा आचरण करने वाली. जो व्यक्ति अध्यात्म और आत्मिक आनंद की कामना रखते हैं, उन्हें इस देवी की पूजा से सहज यह सब प्राप्त होता है.

बताया जाता है कि देवी का ये स्वरूप अनंत फल देने वाला है. जो लोग पूरी श्रद्धा भाव के साथ देवी की भक्ति करते हैं उनके अंदर तप, त्याग,वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है.

क्या है महत्व

मान्यता है कि माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है. जिससे भक्तों का जीवन सफल हो जाता है और किसी भी बाधा का सामना करने के लिए उनमें शक्ति आ जाती है. ज्ञान और वैराग्य देने वाली मां ब्रह्मचारिणी कठिन समय में भक्तों की रक्षा करती है.

मां ब्रह्मचारिणी मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

क्या है पूजा विधि?

इस दिन सुबह उठकर स्नान करके मां ब्रह्मचारिणी की उपासना के समय पीले या सफेद वस्त्र पहनें. इसके अलावा इस दिन मां ब्रह्मचारिणी को सफेद वस्तुएं अर्पित करें, जैसे- मिश्री, शक्कर या पंचामृत. इसके बाद दीपक जलाकर माता का ध्यान करें. उन्हें दूध, दही, शक्कर, घृत और मधु से स्नान करवाएं. फिर फूल, अक्षत, रोली और चंदन से पूजा करें. प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें. कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करें. इनकी पूजा के पश्चात माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करें

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