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शिव की काशी में है काठमांडु का पशुपतिनाथ मंदिर

बात भगवान शिव की और उसके आस्था केंद्र ज्योतिर्लिंगों की हो तो बगैर काशी के ये जिक्र अधूरा है. आखिर शिव के त्रिशूल पर बसी इस काशी में भगवान शिव का वास है, काशी विश्वनाथ मंदिर के रूप में जो कि 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल भी है.

Tabassum Kausar Updated On: Dec 24, 2017 10:41 AM IST

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शिव की काशी में है काठमांडु का पशुपतिनाथ मंदिर

देश के बारह ज्योतिर्लिंगों के अलावा काठमांडु का पशुपतिनाथ मंदिर पूरे विश्व में हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है. कहते हैं भारत के ये ज्योतिर्लिंग शरीर हैं तो नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर उसका ताज है. बात भगवान शिव की और उसके आस्था केंद्र ज्योतिर्लिंगों की हो तो बगैर काशी के ये जिक्र अधूरा है. आखिर शिव के त्रिशूल पर बसी इस काशी में भगवान शिव का वास है, काशी विश्वनाथ मंदिर के रूप में जो कि 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल भी है. काशी से काठमांडु का रिश्ता भी तो गहरा है. पौराणिक मान्यता में ये दोनों के बीच कोख का रिश्ता कहा गया है. दोनों सिस्टर सिटी के नाम से मशहूर भी हैं. काशी जहां मां गंगा के किनारे बसी है, वहीं काठमांडु शहर बागमती नदी के किनारे विकसित हुआ. हिंदुओं की आस्था हिमालय की तराइयों से निकलकर मां गंगा के सहारे बहते, पल्लवित होते अपने अद्भुत, अप्रतिम रूप में काशी में दिखती है.

नक्काशी और भव्यता में दोनों मंदिर एक जैसे

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इन सबसे अलग काशी और काठमांडू के बीच एक और समानता है जिसके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं. देवाधिदेव महादेव शिव की काशी में देवालय का आकर्षण किसी से छिपा नहीं और इन्हीं देवालयों में से एक है पशुपतिनाथ मंदिर. जी हां, काठमांडु जैसा, हूबहू पशुपतिनाथ मंदिर काशी में भी है. जिस तरह काठमांडु में बागमती नदी के किनारे पशुपतिनाथ मंदिर अपनी भव्यता के साथ खड़ा है, ठीक वैसा ही पशुपतिनाथ जी का मंदिर काशी में गंगा किनारे आस्था का केंद्र बना हुआ है. ये मंदिर बिलकुल काठमांडु के पशुपतिनाथ मंदिर की तस्वीर आंखों के सामने उतारता है. मंदिर के स्थापत्य से लेकर उसकी भव्यता एक जैसी है. मंदिर की ईंट से लेकर लकड़ियों पर की गई नक्काशी नेपाल में स्थापित पशुपतिनाथ की ही याद दिलाती है. मंदिर के द्वार से लेकर दीवारों पर की गई सजावट एक जैसी ही है. दरअसल काशी में इस मंदिर का निर्माण ही पशुपतिनाथ मंदिर की तर्ज पर हुआ था. ये मंदिर नेपाली मंदिर के नाम से मशहूर है. नेपाल के राजा राणा बहादुर ने कराया था निर्माण

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वाराणसी के ललिता घाट पर स्थित ये नेपाली मंदिर पशुपतिनाथ मंदिर की रिप्लिका ही है. इसे नेपाल के राजा राणा बहादुर शाह ने बनवाया था. इसी उद्देश्य से वो काशी आए और प्रवास किया. वर्ष 1800 से 1804 तक नेपाल के राजा राणा बहादुर शाह ने काशी में प्रवास किया. प्रवास के दौरान पूजा पाठ के लिए उन्होंने काशी में शिव मंदिर बनवाने का निर्णय लिया, वो भी नेपाल के वास्तु और शिल्प के अनुसार. गंगा किनारे घाट की भूमि इस मंदिर के निर्माण के लिए चुनी और इसका निर्माण शुरू कराया. मंदिर का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ था कि वो नेपाल लौट गए. इसी दौरान 1806 में उनकी मृत्यु हो गई. बाद में उनके बेटे गिरवान युद्ध विक्रम शाह देव ने इस मंदिर का निर्माण 1843 में पूरा कराया. बीच में कई वर्षों तक इस मंदिर का निर्माण रुका था. यही वजह रही कि इस मंदिर के पूरा होने में चालीस साल का वक्त लग गया. लोग ये भी बताते हैं कि नेपाल के राजा ने अपनी दादी की इच्छा के अनुरूप भगवान शिव के इस मंदिर का निर्माण काशी में कराया. नेपाल टूरिज्म विभाग के संरक्षण में है मंदिर

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घाट किनारे बने पशुपतिनाथ मंदिर का संरक्षण नेपाल टूरिज्म विभाग करता है. कुछ समय पहले इसे नेपाल टूरिज्म विभाग से सरकार ने अपने पास ले लिया था. इस पर काशी नरेश ने हस्तक्षेप कर वापस मंदिर का अधिग्रहण नेपाल टूरिज्म विभाग को दे दिया थी. तब से यही मंदिर की देखरेख कर रही है. मंदिर में होने वाले आयोजन से लेकर दैनिक पूजा-पाठ की पूरी जिम्मेदारी इनके पास ही है.

नेपाली वास्तुशैली में बना है मंदिर

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मंदिर का स्थापत्य, उसकी नक्काशी देखते बनती है. टेराकोटा और पत्थरों से बने इस मंदिर की आभा बेहद खूबसूरत है. नेपाली वास्तुशैली में ये पूरा मंदिर बना हुआ है. इस मंदिर को न सिर्फ नेपाल के कारीगरों ने बनाया बल्कि ईंट, पत्थर, लकडि़यां भी नेपाल से ही लाई गईं थीं. लकड़ी पर की गई नक्काशी भी बेहतरीन है और वो उत्कृष्ट शिल्प का नमूना हैं. शीशम व सेखुआ की लकड़ी पर की गई नक्काशी में खजुराहो का सा अक्श नजर आता है. यही वजह है कि इसे मिनी खजुराहो भी कहते हैं. लकड़ियों की बेहतरीन नक्काशी से सजा ये मंदिर को कांठवाला मंदिर भी कहलाता है.  इसे बने करीब दो सौ पूरे हो गए हैं लेकिन आज तक इसकी लकडि़यां खराब नहीं हुईं और लोगों का पूरा भरोसा है कि आने वाले कई साल तक ये ऐसे ही बरकरार रहेंगी. मंदिर से सटे ही एक धर्मशाला भी है जहां काशी में संस्कृत,अध्यात्म, वेद की शिक्षा दीक्षा ग्रहण करने के लिए आने वाले विद्यार्थी रहते हैं.

नेपाल के लोगों की आस्था का केंद्र है यह मंदिर

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नेपाल का हमारे देश से रोटी-बेटी का रिश्ता माना जाता है. सीमा के गांवों में एक-दूसरे के घर शादी करते हैं. भारत के कई लोगों की नेपाल में रिश्तेदारियां हैं. ऐसे में नेपाल के लोगों का भारत में आनाजाना लगा रहता है. खासकर बिहार बार्डर पर बसे गांवों के लोग अक्सर काशी आते हैं.काशी का पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल के लोगों की आस्था का खास केंद्र है. काशी आने पर वे इस मंदिर में दर्शन-पूजन करने जरूर आते हैं. मंदिर की देखरेख भी नेपाल के रहने वाले लोगों के हाथ में है. इसकी पूजा-पद्धति भी काठमांडु के पशुपतिनाथ मंदिर की तरह ही है. जो लोग नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन नहीं कर पाते हैं, इस मंदिर के दर्शन से पशुपतिनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर लेते हैं.

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