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Janmashtami 2018: इस बार 3 सितंबर को मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी

अधिकतर कृष्ण जन्माष्टमी दो अलग-अलग दिनों पर हो जाती है. जब-जब ऐसा होता है, तब पहले दिन वाली जन्माष्टमी स्मार्त संप्रदाय के लोगों के लिए और दूसरे दिन वाली जन्माष्टमी वैष्णव संप्रदाय के लोगों के लिए होती है

Updated On: Aug 30, 2018 03:26 PM IST

FP Staff

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Janmashtami 2018: इस बार 3 सितंबर को मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी

केवल वैष्णव संप्रदाय के लिए ही नहीं बल्कि सभी हिंदुओं के लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एक विशेष पर्व है. यही कारण है पूरी दुनिया में जहां भी हिंदू हैं, वहां यह पर्व पूरी निष्ठा और विधि-विधान से मनाया जाता है. इस साल यह त्योहार सोमवार यानी 3 सितंबर को मनाया जाएगा, जिसके लिए तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही हैं. आइए जानते हैं जन्माष्टमी का शुभ मूहुर्त क्या है?

जन्माष्टमी का मुहूर्त:

अष्टमी तिथि प्रारंभ- 2 सितंबर, 2018 को रात्रि 8:47 बजे से अष्टमी तिथि समाप्त- 3 सितंबर, 2018 को सायंकाल 17:19 बजे तक रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ- 2 सितंबर, 2018 को रात्रि 8:48 बजे से रोहिणी नक्षत्र समाप्त- 3 सितंबर, 2018 को रात्रि 8:04 बजे तक निशीथ काल पूजन- 2 सितंबर, 2018 को रात्रि 11:57 से 12:48 तक सुबह संयोग है .

अधिकतर कृष्ण जन्माष्टमी दो अलग-अलग दिनों पर हो जाती है. जब-जब ऐसा होता है, तब पहले दिन वाली जन्माष्टमी स्मार्त संप्रदाय के लोगों के लिए और दूसरे दिन वाली जन्माष्टमी वैष्णव संप्रदाय के लोगों के लिए होती है. जो कि इस वर्ष भी 2 दिन पड़ रही है. जिसमें प्रथम दिन अर्थात 2 सितंबर को स्मार्त की होगी और 3 सितम्बर को वैष्णव संप्रदाय की मनाई जाएगी.

गृहस्थ जीवन वाले वैष्णव संप्रदाय से जन्माष्टमी का पर्व मनाते हैं और साधु संत स्मार्त संप्रदाय के द्वारा मनाते हैं. स्मार्त अनुयायियों के लिए, हिंदू ग्रन्थ धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु में, जन्माष्टमी के दिन को निर्धारित करने के लिए स्पष्ट नियम हैं. जो वैष्णव संप्रदाय के अनुयाई नहीं हैं, उनको जन्माष्टमी के दिन का निर्णय हिंदू ग्रंथ में बताए गए नियमों के आधार पर करना चाहिए.

इस अंतर को समझने के लिए एकादशी उपवास एक अच्छा उदाहरण है. एकादशी के व्रत को करने के लिए, स्मार्त और वैष्णव संप्रदायों के अलग-अलग नियम होते हैं. ज्यादातर श्रद्धालु एकादशी के अलग-अलग नियमों के बारे में जानते हैं लेकिन जन्माष्टमी के अलग-अलग नियमों से अनभिज्ञ होते हैं. अलग-अलग नियमों की वजह से न केवल एकादशी के दिनों बल्कि जन्माष्टमी के दिनों में एक दिन का अंतर होता है.

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