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गुजरात में 14 जुलाई को रथ यात्राओं के लिए तैयारियों जोरों पर, लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक पीके महापात्र ने बताया कि तीन रथों के निकट के घेराबंद किए गए इलाके में चार-चार हुंडियां लगाई जाएंगी

Updated On: Jul 13, 2018 04:26 PM IST

Bhasha

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गुजरात में 14 जुलाई को रथ यात्राओं के लिए तैयारियों जोरों पर, लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद

गुजरात में भगवान जगन्नाथ के सम्मान में वार्षिक रथ यात्राएं 14 जुलाई को विभिन्न स्थानों पर निकलेंगी.

अहमदाबाद में मुख्य रथ यात्रा जुलूस का आयोजन होगा. इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर 163 छोटी और मध्यम स्तर की रथ यात्राएं निकलेंगी.

ओडिशा के पुरी में ओडिया उत्सव के दौरान निकलने वाली रथ यात्रा में हर साल लाखों हिंदू श्रद्धालु पहुंचते हैं जबकि अहमदाबाद की रथ यात्रा दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार्यक्रम है.

राज्य सरकार ने शुक्रवार को कहा कि रथ यात्रा के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं.

गुजरात के गृह राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने तैयारियों का जायजा लेने के लिए गृह विभाग और पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की.

जडेजा ने कहा कि 14 जुलाई को होने वाले कार्यक्रम के लिए सभी 33 जिलों में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किए जाएंगे.

श्रद्धालुओं से दान स्वीकार करने से सेवादारों को रोकने के बाद पुरी के जगन्नाथ मंदिर के प्रशासन ने 14 जुलाई से शुरू होने वाली रथयात्रा के दौरान रथों के पास 12 दान पात्र लगाने का फैसला किया है.

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक पीके महापात्र ने बताया कि तीन रथों के निकट के घेराबंद किए गए इलाके में चार-चार हुंडियां लगाई जाएंगी.

महापात्र ने बताया कि इसके अतिरिक्त श्रद्धालुओं की आसानी के लिए गुंडिचा मंदिर के अंदर छह और हुंडियां लगाई जाएंगी.

उन्होंने कहा, 'सुरक्षाकर्मी चौबीसों घंटे हुंडियों की निगरानी करेंगे क्योंकि तकरीबन 10 लाख श्रद्धालुओं के रथयात्रा में शामिल होने की उम्मीद है.

पिछले महीने मंदिर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अमल करते हुए सेवादारों को श्रद्धालुओं से नकदी या कोई चीज दान में लेने से रोक दिया. महापात्र ने कहा, 'अगर कोई श्रद्धालु दान देने को इच्छुक है तो उसे दान हुंडी में डालना होगा.'

इस दिन भगवान जगन्नाथ की पूजा की जाती है. पूजा के बाद उन्हें एक विशेष रथा में विराजमान किया जाता है. रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ के अलावा भगवान बलभद्र और मां सुभद्रा भी विराजमान होती हैं.

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