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एक दिन भगवान जगन्नाथ कह उठेंगे...मेरा मेडिकल टेस्ट मत करो उनकी सेवा करो जो वाकई में बीमार हैं

यात्रा से एक हफ्ता पहले जगन्नाथ मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस दौरान भगवान जगन्नाथ तेज बुखार के चलते आराम कर रहे होते हैं

Updated On: Jul 18, 2018 08:29 PM IST

FP Staff

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एक दिन भगवान जगन्नाथ कह उठेंगे...मेरा मेडिकल टेस्ट मत करो उनकी सेवा करो जो वाकई में बीमार हैं

14 जुलाई को ओडिशा के पुरी से भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत हुई. इस रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बालभद्र के साथ विराजमान हुए. भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. अब आपको लग रहा होगा कि रथ यात्रा निकलने के 4 दिन बाद अचानक कैसे भगवान जगन्नाथ को याद किया जा रहा है. इससे पहले आगे कोई बात करें आपको भगवान जगन्नाथ के बारे में कुछ रोचक तथ्य बताते हैं-

जगन्नाथ मंदिर भारत में ऐसा मंदिर है जहां सिर्फ हिंदू और हिंदू धर्म को मानने वालों को जाने की इजाजत होती है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, यात्रा से एक हफ्ता पहले जगन्नाथ मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस दौरान भगवान जगन्नाथ तेज बुखार के चलते आराम कर रहे होते हैं. एक हफ्ते का आराम खत्म होने के बाद भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू होती है.

गुंडिचा मंदिर में 9 दिन आराम करने के बाद भगवान जगन्नाथ मंदिर में वापस लौटते हैं. मान्यता है कि इस दौरान बिना अपनी पसंदीदा मिठाई पोडा पीठा खाए बिना वापस नहीं लौटते.

वहीं, जौनपुर के नगर में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा निकालने से पूर्व शनिवार की सुबह चिकित्सकीय परीक्षण किया गया. जिसमें उनके स्वस्थ्य होने की पुष्टि की गई. रथयात्रा रविवार को पूरे नगर में निकाली जाएगी. इसके लिए तैयारियां जोर-शोर से चल रही है.

यहां तक तो हुई भगवान जगन्नाथ की पसंदीदा चीजों की बात, भगवान के आराम की बात. अब एक ऐसे भारत की तस्वीर दिखाते हैं जो इससे बिल्कुल अलग है.

हाल ही में न्यूज़18 ने एक स्पेशल रिपोर्ट की थी. जिसमें झारखंड में भूख से तड़प रहे लोगों का जिक्र था. रिपोर्ट में बताया गया था कि झारखंड की 20 प्रतिशत जनसंख्या खाने की कमी से जूझ रही है. वहीं पिछले साल आए ग्लोबल हंगर स्ट्राइक के आंकड़ों में कुल 119 देशों में से भारत का स्थान 100वां हो गया है.

2016 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में डायबटीस से मरने वालों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इसका मुख्य कारण बिना आराम के लगातार तनाव में काम करना बताया गया है. 2015 में, 3,46,000 लोगों की डायबटीस से मौत हो गई थी.

एक तरफ जहां हम लोग आंखें मूंद कर भगवान पर विश्वास करते हैं. जो सुख-सुविधाएं भगवान ने कभी मांगी ही नहीं उसे जबरदस्ती उन्हें देने में जुटे हैं. वहीं जिनकी हमारे समाज को जरूरत है उसके लिए कभी कुछ नहीं करते. किसी भी व्यक्ति के लिए अच्छी मेडिकल सुविधा उसका अधिकार है जो उसे हर हाल में मिलना चाहिए. भगवान के रथ को सहारा देने मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री पहुंच जाते हैं, लेकिन उनके ही राज्य में भूख से मर रहे लोगों पर कोई ध्यान नहीं देता शायद वह किसी चुनाव का इंतजार कर हों, लेकिन हम किसका इंतजार करते हैं.

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