S M L

तस्वीरों से जानिए क्यों मनाई जाती है होलिका दहन

होलिका दहन से जुड़ी कई कथाएं प्रसिद्ध हैं लेकिन राजा हिर्ण्यकश्यप और उनके पुत्र पह्लाद की कथा सबसे ज्यादा समाज में प्रचलित है

Updated On: Mar 01, 2018 01:48 PM IST

FP Staff

0
तस्वीरों से जानिए क्यों मनाई जाती है होलिका दहन

होलिका दहन से जुड़ी कई कथाएं प्रसिद्ध हैं लेकिन राजा हिर्ण्यकश्यप और उनके पुत्र पह्लाद की  कथा सबसे ज्यादा समाज में प्रचलित है. इसी के बाद से होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत के संकेत के तौर पर मनाया जाता है. प्रह्लाद को प्रेम, स्नेह, अपने देव पर आस्था, द्र्ढ निश्चय और ईश्वर पर अगाध श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है तो वहीं, हिरण्यकश्यप और होलिका ईर्ष्या, द्वेष, विकार और अधर्म के प्रतीक के रूप में जानी जाती है.

होलिक कथा

holi-02

राजा हिर्ण्यकश्यप अहंकार वश खुद को भगवान मानने लगा था.

holi-03

वो चाहता था की सब केवल उसी की पूजा करें और उसी को अपना ईश्वर मानें

holi-04

पर उसकी इस इच्छा के विपरीत उसका स्वयं का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था.

holi-05

प्रह्लाद की इस भक्ति को देख हिर्ण्यकश्यप बहुत क्रोधित हुआ

holi-06

इसके बाद उसने अपने पुत्र को दण्ड स्वरूप नाना प्रकार से मारने की कोशिश की. उसे हाथी के पांव के नीचे और खाई से फेंकने की कोशिश की.

holi-07

मगर हर बार भगवान विष्षु ने प्रह्लाद की रक्षा की.

holi-08

जब इन सब से बात नहीं बनी तो राजा ने उसे आग में जलाने का आदेश दिया.इसके लिए राजा ने अपनी बहन होलिका से कहा कि वह प्रह्लाद को जलती हुई आग में लेकर बैठ जाए

holi-09

होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी.

holi-10

इस आदेश का पालन हुआ, होलिका प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गई.

holi-11

आश्चर्य की बात थी की होलिका जल गई, और प्रह्लाद नारायण का ध्यान करते हुए होलिका से बच गया.

holi-12

प्रह्लाद धर्म के पक्ष में था और हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका अधर्म निति से कार्य कर रहे थे. अतंत: देव कृपा से अधर्म और उसका साथ देने वालों का अंत हुआ. तभी से ये होलिका पर्व मनाया जाने लगा.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi