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भूल जाएंगे आप अपनी होली, जब देखेंगे अरुणाचल प्रदेश की 'होली'

अरुणाचल प्रदेश में होली से कुछ दिन पहले मनाया जाने वाला त्योहार न्योकूम को देखकर आप शायद एक बार तो अपनी रंगों वाली होली जरूर भूल जाएंगे

Kiran Singh Updated On: Mar 01, 2018 02:59 PM IST

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भूल जाएंगे आप अपनी होली, जब देखेंगे अरुणाचल प्रदेश की 'होली'

इन दिनों सभी के उपर होली का रंग चढ़ा हुआ है, बुराई को खत्म करने के साथ नफरत  पर प्यार का रंग चढ़ाने वाला यह त्योहार वैसे तो उत्तर भारत में बड़े जोर शोर से मनाया जाता हैं. कुछ लोगों के लिए होली घर से नकारात्मकता को खत्म करने वाला दिन है तो कई लोग कुछ समय के लिए सब कुछ भूलकर सिर्फ एक ही रंग में डूब जाते हैं. अगर आप ये सोचते हैं होली पर सिर्फ और सिर्फ हम उत्तर भारत वालों का ही सबसे अधिक हक है तो एक बार वहां चलते हैं जहां सूरज सबसे पहले दस्तक देता है, यानी अरुणाचल प्रदेश में...

holi12 हमारे यहां होली शुरू होने के कुछ दिन पहले वहां भी कुछ ऐसा ही एक त्योहार मनाया जाता है. होली जैसा ही उमंग, होलिका दहन जैसी ही बुराइयों का अंत, देवी- देवताओं को खुश करने का तरीका, सब कुछ देखकर आपको भी अपनी होली याद आ ही जाएगी. बस फर्क है तो नाम में, हम रंगों के त्योहार को होली कहते हैं तो वे इस उमंग के त्योहार को न्योकुम कहते हैं.

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एक ओर फर्क है होली और न्योकुम में वो यह कि होली पर आज कल भले ही मस्ती के साथ हुडदंग अधिक हो गई है, लेकिन वहां ये त्योहार पूरी तरह से पारंपरिक तरह से मनाया जाता है और वो भी पूरा गांव मिलकर मनाता हैं. बीत 23 से 26 फरवरी को यह त्योहार अरुणाचल प्रदेश के याजाली गांव में मनाया गया और इस त्योहार के रंग आप यहां भी देख सकते हैं. न्योकूम ने पीछे का महत्व

holi9 अरुणाचल प्रदेश के याजाली गांव में निशी समुदाय के लोग फसल की बुआई से पहले प्रकृति रूपी ईश्वर का आशीर्वाद लेने के लिए हर साल न्योकुम फेस्टिवल होली से पहले मनाया जाता है.

50वीं सालगिरह का जश्न

holi5 याजाली में यूं तो न्योकुम लंबे समय से मनाया जा रहा है, लेकिन 1968 में इसे खासतौर पर पहचान मिली. 2018 में इसकी 50वीं सालगिरह पर आयोजित जश्न में न सिर्फ याजाली गांव बल्कि अन्य गांवों के हजारों लोगों ने भी हिस्सा लिया.

फसल से पहले आशीर्वाद

holi13 न्योकुम में चार दिन तक मस्ती भरा माहौल रहता है, लेकिन इन सबके बीच समुदाय के मुख्य पुजारी लगातार मंत्रोच्चार कर प्रकृति को खुश करने की कोशिश करते हैं.

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अंतिम दिन पूरे गांव के लोग एक कार्निवल के तौर पर निकलते हैं और पूजा के मुख्य ग्राउंड तक पहुंचते हैं, जहां बलि देने के साथ पूजा संपन्न होती है.

पूजा वाले दिन बारिश जरूरी

holi4 इस समुदाय की मान्यता है कि मुख्य पूजा वाले दिन बारिश जरूर आती है, जो संकेत है कि ईश्वर आपसे खुश है और फसल अच्छी होने वाली है. पूजा खत्म होने के बाद शुरू होता है मस्ती का दौर, जहां कोई भेदभाव नहीं, कोई रोकटोक नहीं. हर कोई बस नाचने और गाने में मग्न रहता है.

बुराई को खत्म करने का होहिका दहन तैसा ही तरीका

होली से पहले होलिका दहन किया जाता है, जिसमें लोग अपने घर के सभी पुरानी चीजों का जला देते हैं. माना जाता है कि इससे घर के फैली नकारात्मक शक्ति और बुराइयों का अंत होगा.

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ठीक न्योकम त्योहार में बुराई का अंत करने के लिए कुछ ऐसा ही किया जाता है. लेकिन यहां घास फूस की तरह होलिका ना बनाकर एक व्यक्ति को शैतान रूप में खड़ा दिया जाता है और उसे गांव के लोग मारते (काफी हल्का प्रहार) हैं.

 

फोटो साभार: अमित कुमार

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