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गया में पिंडदान करने के पीछे क्या है पूरी कहानी

पितृ पक्ष के दौरान गया में 17 दिनों का मेला लगता है जिसमें देश-विदेश से हजारों-लाखों लोग पिंडदान करने आते हैं

Updated On: Sep 25, 2018 02:51 PM IST

Rituraj Tripathi Rituraj Tripathi

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गया में पिंडदान करने के पीछे क्या है पूरी कहानी

पितृपक्ष की शुरुआत 24 सितंबर 2018 से हो गई है. यह 8 अक्टूबर तक चलेगा. इस दौरान लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए श्राद्ध करते हैं. प्राचीन मान्यताएं कहती हैं कि पितृपक्ष में जो पिंडदान किया जाता है वह सीधा पूर्वजों तक पहुंचता है और उनके स्वर्ग जाने का रास्ता तय करता है.

ऐसा कहा जाता है कि बिहार के गया में पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है, फिर उन्हें जन्मों के बंधन में नहीं बंधना पड़ता. पितृ पक्ष के दौरान गया में 17 दिनों का मेला लगता है जिसमें देश-विदेश से हजारों-लाखों लोग पिंडदान करने आते हैं.

अश्विन कृष्णपक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक के समय को पितृपक्ष कहा जाता है. इस दौरान पुत्र का कर्तव्य होता है कि वह माता-पिता की मृत्यु के बाद उनका विधिवत श्राद्ध करे.

गया में पिंडदान करने की एक खास वजह भी है. गया को भगवान विष्णु का नगर मानते हैं और यह मोक्ष की भूमि कही जाती है. विष्णु पुराण के मुताबिक यहां जिन लोगों का पूरी श्रद्धा के साथ श्राद्ध किया जाता है, वह मोक्ष को प्राप्त हो जाते हैं. ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि गया में भगवान विष्णु खुद ही पितृ देवता के रूप में मौजूद रहते हैं.

गरुड़ पुराण और गयासुर नाम के राक्षस की वजह से भी है गया का महत्व

गरुड़ पुराण में कहा गया है कि अगर गया में पिंडदान किया जाता है तो घर से निकले हुए कदम पूर्वजों के लिए स्वर्ग की सीढ़ी बनते हैं. गया का नाम गया क्यों पड़ा, इसके पीछे भी एक कहानी है. प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक गयासुर नाम के राक्षस ने ब्रह्मा से वरदान मांगा था कि उसका शरीर देवताओं जैसा हो जाए और उसके दर्शन से लोग पाप मुक्त हो जाएं.

लेकिन वरदान पाने के बाद स्वर्ग में पापियों की संख्या बढ़ने लगी जिसके लिए देवताओं ने एक यज्ञ किया. इस यज्ञ के लिए देवताओं ने गयासुर से पवित्र जगह मांगी. जिसके बाद गयासुर ने अपना शरीर यज्ञ के लिए अर्पित कर दिया.

जब गयासुर जमीन पर लेटा तो उसका पूरा शरीर पांच कोस में फैल गया. इसी जगह को गया कहते हैं. गयासुर ने देवताओं से वर मांगा था कि इस स्थान पर जो भी पिंडदान करेगा उन्हें मुक्ति मिलेगी.

इसके अलावा गया में पिंडदान करना इसलिए भी महत्व रखता है क्योंकि त्रेतायुग में भगवान राम, लक्ष्मण और सीता ने राजा दशरथ का पिंडदान इसी जगह किया था इसलिए देश-विदेश से लोग अपने पूर्वजों के मोक्ष के लिए यहां आते हैं. गया के अलावा लोग हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, गंगासागर, पुष्कर और चित्रकूट समेत कई जगहों पर भी पिंडदान के लिए जाते हैं.

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