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Ganesh Chaturthi 2018: गणपति विसर्जन में इन बातों का रखें ध्यान, जानिए विधि

जितना महत्व गणपति पूजा का होता है उतना ही महत्व गणेश विसर्जन का भी होता है. ऐसे में गणेश विसर्जन को भी पूरे विधि विधान से पूरा किया जाना काफी जरूर होता है.

Updated On: Sep 21, 2018 07:26 PM IST

FP Staff

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Ganesh Chaturthi 2018: गणपति विसर्जन में इन बातों का रखें ध्यान, जानिए विधि

देशभर में गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जाती है. दस दिनों तक चलने वाला ये पर्व इस साल 23 सितंबर तक मनाया जाएगा. इस साल 23 सितंबर को गणपति विसर्जन किया जाएगा. जितना महत्व गणपति पूजा का होता है उतना ही महत्व गणेश विसर्जन का भी होता है. ऐसे में गणेश विसर्जन को भी पूरे विधि विधान से पूरा किया जाना काफी जरूर होता है.

विसर्जन वाले दिन सुबह पूजा खत्म कर बप्पा को विसर्जन के लिए तैयार किया जाता है. नाचते-गाते और गुलाल उड़ाते हुए लोग पूरे शहर में गणपति को घुमाते हैं. इसी के साथ तरह-तरह की झाकियां भी निकाली जाती हैं. इस साल विसर्जन सुबह 8 बजे से ही शुरू हो जाएगा. गणेश विसर्जन 23 सितंबर को सुबह 8 बजे से शुरू होकर 12 बजकर 30 मिनट तक चलेगा. फिर दोपहर को 2 बजे से शुरू होकर साढ़े 3 बजे तक चलेगा. इसके बाद शाम को 6 बजकर 30 मिनट से फिर गणपति का विसर्जन शुरू होगा जो रात के 11 बजे तक चलेगा. जिस तरह पूजा करने की विधि होती है, उसी तरह विसर्जन भी पूरी विधि के साथ किया जाना जरूरी होता है.

गणपति विसर्जन की विधि

विसर्जन के दिन गणपति की अच्छी तरह पूजा करें. प्रसाद का भोग लगाकर उसे सब में बांट दें. गणेश जी का स्वस्तिवाचन करें. एक साफ पाटा लें और उसे गंगाजल या गौमूत्र से शुद्ध कर उस पर स्वास्तिक बनाएं. स्वास्तिक घर की महिला के जरिए ही बनाया जाए. अब पाटे के चारों कोनों पर सुपारी रखें. इसके बाद पाटे पर अक्षत रखें और एक पीला, गुलाबी या लाल कपड़ा बिछाएं. कपड़े पर गुलाब और दूसरे फूल बिछाएं. अब भगवान गणेश को इस पाटे पर स्थापित करें. इसके बाद फल, फूल, वस्त्र, दक्षिणा, 5 मोदक आदि रखें और जोर से भगवान गणपति का जयकारा लगाएं.

इन बातों का भी रखें ध्यान

वहीं भगवान गणेश को ले जाते हुए एक छोटी लकड़ी पर चावल, गेहूं, दक्षिणा और पंच मेवा की पोटली भी बनाकर साथ रखी जाती है. इसके अलावा पूरे रास्ते के लिए वह सामान भी रखे जाते हैं, जिसकी यात्रा के दौरान जरूरत पड़ सकती है. विसर्जन स्थल पर पहुंचने के बाद और विसर्जन करने से पहले एक बार फिर भगवान गणेश की आरती की जाती है. वहीं आखिर में इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि भगवान गणेश जी को प्रतिमा को पानी में फेंकें नहीं, बल्कि पूरे सम्मान और आदर भाव के साथ उन्हें और उनके साथ पूरी सामग्री को पानी में धीरे-धीरे बहा दें.

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