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Ganesh Chaturthi 2018: इको फ्रेंडली गणपति को बनाएं अपना दोस्त, इस तरह से मिलेगा लाभ

इस साल गणेश चतुर्थी 13 सितंबर से शुरू होकर 23 सितंबर तक मनाई जाएगी और बाजार में बप्पा की कई सुंदर प्रतिमाएं भी मिल जाएंगी.

Updated On: Sep 13, 2018 05:10 PM IST

FP Staff

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Ganesh Chaturthi 2018: इको फ्रेंडली गणपति को बनाएं अपना दोस्त, इस तरह से मिलेगा लाभ
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पूरे देश में गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा के आगमन को बड़े ही धूम-धाम तरीके से मनाया जा रहा है. हर कोई अपने अंदाज में गणपति के इस उत्सव को जबरदस्त तरीके से मना रहा है. लेकिन इस खास मौक पर लोग इको फ्रेंडली गणपति को काफी तवज्जो दे रहे हैं. पर्यावरण के लिहाज से इको फ्रेंडली गणपति काफी अच्छे माने जा रहे हैं.

इस साल गणेश चतुर्थी 13 सितंबर से शुरू होकर 23 सितंबर तक मनाई जाएगी. ऐसे में बाजार में प्लास्टिक ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियां काफी मिल जाती हैं जो कि देखने में काफी सुंदर लगती है लेकिन पर्यावरण के लिहाज से ये काफी हानिकारक रहती है क्योंकि एक समय के बाद गणपति का विसर्जन भी करना होता है. ऐसे में (पीओपी) पर्यावरण को काफी दूषित कर देता है. जिसके कारण अब इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं का चलन बढ़ रहा है. आइए एक नजर डालते हैं कि इको फ्रेंड बप्पा के लाभ के बारे में...

इको फ्रेंडली गणपति न होने से नुकसान: पीओपी और प्लास्टिक से बनी प्रतिमाओं में खतरनाक रसायनिक रंगों का इस्‍तेमाल किया गया है. यह रंग स्‍वास्‍थ्‍य के लिए काफी हानिकारक होते हैं. जब पीओपी से बने बप्पा का विसर्जन किया जाता है तो पानी में पीओपी से बनी प्रतिमाएं जल्दी घुलती नहीं हैं. इससे पानी की गुणवत्ता पर असर पड़ता है. वहीं पानी में घुल जाए तो पीओपी पानी की सतह पर जमा हो जाती है. इन प्रतिमाओं के रसायनिक रंग पानी में मिल जाते हैं और बाद में इसी पानी का इस्तेमाल खाना पकाने और नहाने जैसे कामों में किया जाता है. ऐसे पानी के इस्तेमाल से लोग बीमार भी हो जाते हैं. इसी पानी का इस्तेमाल खेती के कामों में भी किया जाता है. ऐसे में दूषित पानी से होने वाली फसलें भी काफी प्रभावित हो जाती है और सब्जियों के साथ हानिकारण तत्व भी घर तक पहुंच जाते हैं.

इको फ्रेंडली गणपति से होने से फायदे: मिट्टी से बनी प्रतिमाएं पीओपी से बनी प्रतिमाओं की तुलना में पर्यावरण को हानि नहीं पहुंचाती है. इको फ्रेंडली प्रतिमाएं पानी में जल्दी घुल जाती है. वहीं इको फ्रेंडली गणपति को सुंदर बनाने के लिए इसमें कच्चे और प्राकृतिक रंगो का इस्तेमाल किया जाता है जो कि नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. ऐसे में न पानी दूषित होता है और न ही कोई बीमारियां फैलने का डर रहता है.

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