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देवउठनी एकादशी 2018: आज जरूर करें ये काम, मिलेगा एक हजार अश्वमेघ यज्ञ करने जितना फल

सभी एकादशी में कार्तिक शुक्ल एकादशी का विशेष महत्व होता है. इसे देवप्रबोधनी एकादशी या देव उठनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है

Updated On: Nov 19, 2018 09:59 AM IST

FP Staff

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देवउठनी एकादशी 2018: आज जरूर करें ये काम, मिलेगा एक हजार अश्वमेघ यज्ञ करने जितना फल

आज यानी 19 नवंबर को देवउठनी एकादशी है. पूरे साल में 24 एकादशी होती है. हर महीने दो एकादशी पड़ती है, एक शुक्ल पक्ष में तो दूसरी कृष्ण पक्ष में. सभी एकादशी में कार्तिक शुक्ल एकादशी का विशेष महत्व होता है. इसे देवप्रबोधनी एकादशी या देव उठानी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है.

क्या है महत्व?

इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के बाद जागते हैं.तुलसी के पौधे से उनका विवाह होता है. देवउठनी एकादशी को तुलसी विवाह उत्सव भी कहा जाता है. देवउठनी एकादशी के बाद सभी तरह के शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं. मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से एक हजार अश्वमेघ यज्ञ करने जितना फल मिलता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और भगवान विष्णु के पूजन का विशेष महत्व है. इसके अलावा ये व्रत धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष के लिए किया जाता है.

मान्यता है कि इससे पहले आषाढ़ महीने की देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु चार महीने के लिए सो जाते हैं. इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं होते.

कैसे करें व्रत?

इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान लेना चाहिए. इसके बाद सूरज के उगने से पहले ही व्रत का संकल्प ले और सूरज उगने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें. पूजन के अंत में ‘ऊं भूत वर्तमान समस्त पाप निवृत्तय-निवृत्तय फट्’ मंत्र की 21 माला जाप कर अग्नि में शुद्ध घी की 108 आहुतियां अवश्य देनी चाहिए. इससे जीवन के सारे रोगों, कष्टों व चिंताओं से मुक्ति मिल जाती है. जीवन में कल्याण ही कल्याण होगा. मान्यता है कि इश दिन बिना आहार ग्रहण किए व्रत किया जाता है. पूरे दिन व्रत रखने के बाद अगले दिन पूजा करने के बाद ही व्रत पूरा माना जाता है.

क्या है शुभ मुहूर्त?

देवउठनी एकादशी में पारण का खास महत्व है. इस साल एकादशी का पारण मुहूर्त 19 नवंबर को सुबह 06 बजकर 48 मिनट से लेकर 08 बजकर 56 मिनट तक है.

क्या है पूजा करने की विधि

तुलसी विवाह के दिन एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस दिन तुलसी जी के साथ विष्णु की मूर्ति रखी जाती है। विष्णु की मूर्ति को पीले वस्त्र से सजाया जाता है. तुलसी के पौधे को सजाकर उसके चारों तरफ गन्ने का मंडप बनाया जाता है.तुलसी जी के पौधे पर चुनरी चढ़ाकर विवाह के रिवाज होते है.

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