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Chhath Pooja 2018: आखिर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को ही क्यों मनाई जाती है छठ?

सूर्य उपासना का महापर्व छठ कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी की तिथि तक भगवान सूर्यदेव की अटल आस्था के रूप में मनाया जाता है.

Updated On: Nov 12, 2018 02:58 PM IST

FP Staff

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Chhath Pooja 2018: आखिर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को ही क्यों मनाई जाती है छठ?

छठ पर्व की शुरुआत हो चुकी है. भगवान सूर्य की उपासना के साथ छठ पर्व की शुरुआत होती है. हिंदू धर्म में किसी भी पर्व की शुरुआत स्नान के साथ ही होती है और ये पर्व भी स्नान यानी नहाय-खाय के साथ होता है. कार्तिक महीने में छठ मानने का विशेष महत्व है. सूर्य उपासना का महापर्व छठ कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी की तिथि तक भगवान सूर्यदेव की अटल आस्था के रूप में मनाया जाता है. हालांकि मुख्य तौर पर छठ कार्तिक शुक्ल षष्ठी को ही मनाया जाता है.

कार्तिक शुक्ल षष्ठी को ही क्यों?

छठ कार्तिक शुक्ल षष्ठी को ही क्यों मनाया जाता है? छठ-पूजा की कई कथाओं में से एक कथा का मूल प्रश्न यह है. इस कथा की मानें तो राजा प्रियंवद को कोई संतान न थी. महर्षि कश्यप की शरण में गए, पुत्रेष्टि यज्ञ हुआ और यज्ञाहुति की खीर राजा ने पत्नी मालिनी को खिलाई. यज्ञ के पुण्य-प्रभाव से पुत्र तो हुआ लेकिन मृत.

अंत्येष्टि को श्मशान घाट पहुंचे राजा प्रियंवद पुत्र-वियोग में प्राण त्यागने को तत्पर हुए. दैव से यह दुख देखा ना गया. करुणा के वशीभूत एक देवी देवसेना प्रकट हुईं, कहा, ‘सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं षष्ठी कहलाती हूं. राजन! तुम मेरा पूजन करो, बाकी लोगों को भी प्रेरित करो.’ राजा ने इस देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें संतान की प्राप्ति हुई. कथा के मुताबिक यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी और अब तक चलन जारी है.

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