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प्रकृति प्रेम और बेटियों के प्रति सम्मान के भाव का पर्व है छठ

इस पर्व को इकलौता ऐसा पर्व कहा गया है जिसमें व्रती महिलाएं भगवान सूर्य से अपने भरे पूरे परिवार के लिए बेटी की मांग करती हैं

Updated On: Nov 13, 2018 01:57 PM IST

Pankaj Kumar Pankaj Kumar

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प्रकृति प्रेम और बेटियों के प्रति सम्मान के भाव का पर्व है छठ

छठ पर्व में षष्ठीमाता और सूर्य देवता की पूजा एक साथ की जाती है. ये इकलौता ऐसा पर्व है जहां उगते और डूबते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है.

बिहार के लिए छठ पर्व का विशेष महत्तव है. यहां पूरा प्रदेश छठ पर्व मनाने में तल्लीन दिखाई पड़ रहा है. चार दिवसीय लोक पर्व का दूसरा दिन का व्रत अनुष्ठान खरना के साथ संपन्न हुआ. मंगलवार को डूबते सूरज को अर्घ देकर तीसरे दिन का व्रत पूरा किया जाएगा वहीं बुधवार सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर लोक आस्था के इस महान पर्व के चौथे दिन का समापन होगा.

छठ कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला पर्व है. इसे मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है ,लेकिन पिछले कुछ सालों में इसका जोरदार बिस्तार हुआ है. देश के बड़े शहर जैसे राजधानी दिल्ली सहित आर्थिक राजधानी मुंबई में भी इसे जोरदार तरीके से मनाया जाने लगा है. इतना ही नहीं छठ के गीत दोहा,कतर,सिंगापुर,अमेरिका और मॉरिशस में भी सुना जा सकता है. यानी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग ने जहां-जहां भी पलायन किया हैं वहां छठ पर्व का प्रसार होने लगा है. छठ पर्व साल में दो बार मनाया जाता है. पहली छठ पूजा चैत्र महीने में वहीं दूसरी बार कार्तिक महीने में मनाई जाती है. कार्तिक महीने में छठ मनाने वालों की संख्या कहीं ज्यादा होती है.

Chhath festival in Patna

पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी नहाय खाय के रूप में मनाया जाता है. छठ करने वाली महिला गंगा स्नान जिसे पवित्र स्नान कहते हैं, उसे कर शुद्ध भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं .

क्यों मनाया जाता है छठ पर्व

कहा जाता है कि सुर्य देव और छठी मैया का संबंध भाई बहन का है. षष्ठी की पूजा सबसे पहले सूर्य भगवान ने ही की थी. वैसे यह दिन वैज्ञानिक आधार पर भी विशेष माना गया है. छठ पर्व के समय सूर्य की पराबैंगनी किरणें धरती पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती हैं इसलिए उसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए सूर्य भगवान की अराधना की जाती है.

वैसे छठ पर्व को प्रकृति की पूजा से भी जोड़कर देखा जाता है. कहा जाता है कि आदि देव सूर्य की जरूरत धरती पर मौजूद तमाम जीव जंतुओं को है. सूर्य ही जीवन है और जल का स्रोत भी क्योंकि सूर्य ही जल के स्रोत को रास्ता देता है. छठ के मौके पर प्रकृति द्वारा प्रदत्त तमाम चीजें खासकर विलुप्त हो रही कंदमूल फल का प्रयोग होता है जिससे उसके संरक्षण को बढ़ावा मिलता है. इसलिए इसे आस्था के साथ-साथ प्रकृति से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ पर्व भी कहा जाता है.

इतना ही नहीं इस पर्व को सामिजक समरसता को बढ़ावा देने वाले पर्व के रूप में भी देखा जाता है. एक ही घाट पर विभीन्न जाति के लोग इकट्ठा होते हैं,जिससे सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलता है. इतना ही नहीं समाज के हर वर्ग के लोग सड़क से लेकर घाट तक की सफाई करते हैं साथ ही प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग करते हैं.

Hindu devotee holds coconut while standing in waters of Arabian Sea as she worships Sun god Surya during "Chhath Puja" in Mumbai

पौराणिक कथाओं में छठ का विशेष महत्तव 

छठ पर्व को पौराणिक कथा से भी जोड़कर देखा जाता है. छठ पर्व को लेकर यह भी प्रचलित है कि जब पांडव सारा राज पाठ जुए में हार गए थे तब द्रौपदी ने छठ पर्व रखा था.

कहा जाता है कि सबसे पहले च्यवन ऋषि की पत्नी सुकन्या ने इस पर्व की शुरुआत की थी. इस व्रत को करने के उपरांत सुकन्या ने अपने नेत्रहीन पति को को निरोग और नेत्रयुक्त किया था. वहीं द्रौपदी को भी हारा हुआ साम्राज्य इस व्रत को कर लेने के उपरांत मिल पाया था. इतना ही नहीं सम्राट जरासंध के पुर्वज जो कि कुष्ठ रोग से पीड़ित थे उन्हें छठ व्रत के उपरांत ही कुष्ठ रोग से निपटारा मिल पाया था.

बेटियों के लिए मन्नत मांगने वाला पर्व 

इस पर्व को इकलौता ऐसा पर्व कहा गया है जिसमें व्रती महिलाएं भगवान सूर्य से अपने भरे पूरे परिवार के लिए बेटी की मांग करती हैं. इतना ही नहीं व्रती महिलाएं अलग-अलग लोकगीत के जरिए अराध्य भगवान सूर्य से कामना करती हैं कि उनका घर धन धान्य से भरा पूरा हो और साथ ही उनके सुखी परिवार के लिए अराध्य सूर्य देव उन्हें बेटी और सुयोग्य दामाद भी दें, जिससे उनका घर संपूर्ण हो सके. जाहिर है लोक आस्था के इस पर्व को मनाने वाले लोग कहते हैं भारतीय समाज में बेटियों का विशेष स्थान रहा है इसलिए लोग अन्न,जल और तमाम चीजों के लिए भगवान सूर्य की पूजा करते हैं. इसके साथ ही समाज का अस्तित्व बरकरार रहे इसलिए व्रती महिलाएं अराध्य सूर्य देव की अराधना कर उनसे बेटी की कामना भी करते हैं.

Chhath in Amritsar

सर्वधर्म संभाव का पर्व है छठ 

बिहार के औरंगाबाद की नजमा पिछले आठ सालों से छठ पर्व मना रही हैं. औरंगाबाद के गोह की रहने वाली नजमा के मुताबिक उनका इस पर्व पर विश्वास तब और बढ़ गया जब उनकी मन्नत दो बच्चों के जन्म के बाद पूरी हुई. इतना ही नहीं मुज्फ्फरपुर जेल में भी मुस्लिम समुदाय के दो लोग जेल के अंदर काफी निष्ठा से छठ व्रत मना रहे हैं. प्रदेश के अन्य शहरों में भी नदी के आस पास बसी आबादी छठ पर्व को लेकर साफ सफाई में जुटे लोगों को मदद करने में भरपूर सहयोग दे रहे हैं. लखीसराय, मुंगेर, पटना और मुज्जफरपुर जैसे जिलों में सभी धर्मों की सहभागिता इस लोकपर्व में साफ तौर पर देखी जा सकती है.

जाहिर है छठ पूजा सूर्य की पूजा है और इस पूजा के जरिए अराध्य सूर्यदेव को इस बात के लिए धन्यवाद दिया जाता है कि चल रही सृष्टि में सूर्य का योगदान अहम है. भगवान सूर्य को पहले अस्ताचलगामी अर्घ देकर पूजा जाता है और फिर उन्हें उगते हुए रूप में अर्घ्य देकर धरती पर जीवन प्रदान करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया जाता है.

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