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चैत्र नवरात्रि 2018: पांचवें दिन इस मंत्र से करें स्कंदमाता की पूजा

चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन 22 मार्च को गुरुवार को माता दुर्गा के पांचवे स्वरूप में मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी

Updated On: Mar 21, 2018 08:15 PM IST

FP Staff

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चैत्र नवरात्रि 2018: पांचवें दिन इस मंत्र से करें स्कंदमाता की पूजा
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भगवती दुर्गा के पांचवे स्वरूप को स्कंदमाता के रूप में जाना जाता है. चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन 22 मार्च को गुरुवार को माता दुर्गा के पांचवे स्वरूप में मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी. इनकी उपासना करने से भक्त की सर्व इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं. भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

स्कंदमाता का स्वरूप

स्कंद का अर्थ है कुमार कार्तिकेय अर्थात माता पार्वती और भगवान शिव के जेष्ठ पुत्र कार्तिकय. जो भगवान स्कंद कुमार की माता है वही है मां स्कंदमाता. शास्त्र अनुसार देवी स्कंदमाता ने अपनी दाई तरफ की ऊपर वाली भुजा से बाल स्वरूप में भगवान कार्तिकेय को गोद में लिया हुआ है.

स्कंदमाता स्वरुपिणी देवी की चार भुजाएं हैं. ये दाहिनी तरफ की ऊपर वाली भुजा से भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं. बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा वरमुद्रा में और नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है, उसमें कमल-पुष्प लिए हुए हैं.

कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है. सिंह इनका वाहन है. शेर पर सवार होकर माता दुर्गा अपने पांचवें स्वरुप स्कंदमाता के रुप में भक्तजनों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहती हैं. इन्हें कल्याणकारी शक्ति की अधिष्ठात्री कहा जाता है. देवी स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं तथा इनकी मनोहर छवि पूरे ब्रह्मांड में प्रकाशमान होती है.

उपासना का मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु स्कंदमाता रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

अर्थात् सिंह पर सवार रहने वाली और अपने दो हाथों में कमल का फूल धारण करने वाली यशस्विनी स्कंदमाता हमारे लिए शुभदायी हो.

इस तरह करें पूजा

घर के ईशान कोण (पूर्व और उत्तर दिशाएं जहां मिलती हैं) में हरे वस्त्र पर देवी स्कंदमाता का चित्र स्थापित करके उनका विधिवत दशोपचार पूजन करें. कांसे के दिए में गौघृत का दीप करें, सुगंधित धूप करें, अशोक के पत्ते चढ़ाएं, गौलोचन से तिलक करें, मूंग के हलवे का भोग लगाएं. इस विशेष मंत्र 'ॐ स्कंदमाता देव्यै नमः' को 108 बार जपें. इसके बाद भोग किसी गरीब को बांट दें.

पूजा का विशेष मुहूर्त

स्कंदमाता की पूजा के लिए दिन का दूसरा प्रहर सबसे सही है. सुबह 08:00 बजे से सुबह 09:00 बजे के बीच स्कंदमाता की पूजा करने से अधिक लाभ होगा.

पूजा से विशेष लाभ

देवी स्कंदमाता की साधना उन लोगों के लिए सबसे अधिक लाभदायक है, जिनकी आजीविका का संबंध मैनेजमेंट, वाणिज्य, बैंकिंग अथवा व्यापार से है. इनकी उपासना से पारिवारिक शांति आती है, रोगों से मुक्ति मिलती है और समस्त व्याधियों का अंत होता है. रोगों से मुक्ति हेतु 6 हरे गोल फल स्वयं से वारकर देवी स्कंदमाता पर चढ़ाएं. पारिवारिक अशांति से मुक्ति हेतु स्कंदमाता पर चढ़ी मिश्री किसी कन्या को भेंट करें. सर्व व्याधियों के अंत हेतु देवी स्कंदमाता पर चढ़ी पालक किसी गाय को खिलाएं.

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