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चैत्र नवरात्र 2018: तीसरे दिन ऐसे करें चंद्रघंटा माता की पूजा, इन बातों का रखे खास खयाल

इस देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं.

Updated On: Mar 20, 2018 03:48 PM IST

FP Staff

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चैत्र नवरात्र 2018: तीसरे दिन ऐसे करें चंद्रघंटा माता की पूजा, इन बातों का रखे खास खयाल

मां दुर्गा के नौ रूपों में तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा होती है. दुर्गा का तीसरा रूप चंद्रघंटा है. इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है. इनके शरीर का रंग सोने के समान बहुत चमकीला है और इनके दस हाथ हैं.

वे खड्ग और अन्य अस्त्र-शस्त्र से विभूषित हैं. सिंह पर सवार दुष्‍टों के संहार के लिए हमेशा तैयार रहती हैं. इनके घंटे सी भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य और राक्षस कांपते रहते हैं.

चंद्रघंटा मां दुर्गा का तीसरा रूप है. इसका अर्थ है चंद्रमा के आकार वाले घंटे को धारण करने वाली

चंद्रघंटा मां दुर्गा का तीसरा रूप है. इसका अर्थ है चंद्रमा के आकार वाले घंटे को धारण करने वाली

इनकी पूजन विधि इस प्रकार है

तीसरे दिन की पूजा का विधान भी लगभग उसी प्रकार है जो दूसरे दिन की पूजा का है. इस दिन भी आप सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित देवी-देवता, तीथरें, योगिनियों, नवग्रहों, दशदिक्पालों, ग्राम एवं नगर देवता की पूजा अराधना करें. फिर माता के परिवार के देवता, गणेश, लक्ष्मी, विजया, कार्तिकेय, देवी सरस्वती, एवं जया नामक योगिनी की पूजा करें फिर देवी चन्द्रघंटा की पूजा अर्चना करें. चन्द्रघंटा की मंत्र - या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां की उपासना का मंत्र

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता, प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता.

देवी पूजा का महत्‍व

नवरात्रि में तीसरे दिन इसी देवी की पूजा का महत्व है. इस देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं. दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाई देने लगती हैं. इन क्षणों में साधक को बहुत सावधान रहना चाहिए. इस देवी की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है.

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