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Kumbh 2019: कुंभ में आज तीसरा और अंतिम शाही स्नान, मिलेगा विशेष फल

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा-आराधना की जाती है. मान्यता है कि दोनों शाही स्नान के बाद जो श्रद्धालु तीसरा शाही स्नान भी करते हैं उन्हें पूर्ण कुंभ स्नान का फल मिलता है

Updated On: Feb 10, 2019 06:22 PM IST

FP Staff

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Kumbh 2019: कुंभ में आज तीसरा और अंतिम शाही स्नान, मिलेगा विशेष फल

आज यानी बसंत पंचमी के दिन कुंभ मेले में तीसरा और आखिरी शाही स्नान है. इस खास मौके पर दुनियाभर से तमाम लोग संगम में डुबकी लगाने के लिए प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले में पहुंच रहे हैं. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा-आराधना की जाती है.

माना जाता है कि बसंत पंचमी के दिन संगम में स्नान करने से मां सरस्वती को प्रसन्न किया जा सकता है. मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती प्रकट हुई थीं, इसलिए इस दिन संगम स्नान का विशेष महत्व है.

तीनों शाही स्नान से मिलता है विशेष फल

इससे पहले मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के दिन क्रमश: पहला और दूसरा शाही स्नान हुआ था. मान्यता है कि इन दोनों शाही स्नान के बाद जो श्रद्धालु तीसरा शाही स्नान भी करते हैं उन्हें पूर्ण कुंभ स्नान का फल मिलता है.

2 करोड़ से ज्यादा लोगों के डुबकी लगाने की उम्मीद

तीसरे शाही स्नान के मौके पर साधु-संतों और नागा बाबाओं ने एक साथ संगम में डुबकी लगाई. माना जा रहा है कि इस बार कुंभ में 2 करोड़ से भी ज्यादा लोग संगम में डुबकी लगाने के लिए पहुंच सकते हैं.

इस खास मौके पर सुरक्षा की भी खास तैयारी की गई है. यूपी के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह ने पहले कहा था कि पूरे क्षेत्र को नौ जोन और 20 सेक्टरों में बांटा गया है. इनकी सुरक्षा के लिए 20,000 पुलिसकर्मियों, 6,000 होमगार्ड तैनात किए गए हैं. इसके अलावा 40 पुलिस थाने, 58 चौकियां, 40 दमकल केंद्र अलग से बनाए गए हैं. साथ ही केंद्रीय बलों की 80 कंपनियां और पीएसी की 20 कंपनियां भी तैनात हैं.

बसंत पंचमी पौराणिक कथा

पुरानों के मुताबिक ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना तो कर दी लेकिन वो इसकी नीरसता को देखकर असंतुष्ट थे. फिर उन्होंने अपने कमंडल से जल छिटका जिससे धरा हरी-भरी हो गई. साथ ही विद्या, बुद्धि, ज्ञान और संगीत की देवी प्रकट हुई. ब्रह्मा जी ने आदेश दिया कि इस सृष्टि में ज्ञान और संगीत का संचार कर जगत का उद्धार करो. तभी देवी ने वीणा के तार झंकृत किए जिससे सभी प्राणी बोलने लगे, नदियां कलकल कर बहने लगी हवा ने भी सन्नाटे को चीरता हुआ संगीत पैदा किया. तभी से बुद्धि और संगीत की देवी के रूप में सरस्वती जी की पूजा होने लगी. बसंत पंचमी के दिन को माता पिता अपने बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की शुरुआत के लिए शुभ मानते हैं.

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन बच्चे की जिह्वा पर शहद से ऐं या ॐ बनाना चाहिए. इससे बच्चा ज्ञानवान होता है और शिक्षा जल्दी ग्रहण करने लगता है. बच्चों को उच्चारण सिखाने के लिहाज से भी यह दिन बहुत शुभ माना जाता है. बसंत पंचमी को परिणय सूत्र में बंधने के लिए भी बहुत सौभाग्यशाली माना जाता है. गृह प्रवेश से लेकर नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी इस दिन को शुभ माना जाता है.

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