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अमावस्या-सूर्य ग्रहण: पितरों की पूजा और ब्रह्म भोज से करें इस दिन की शुरुआत

अमावस्या के दिन भूत-प्रेत, अशुभ साया और दैत्य सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं. इसकी वजह से हमारे चारों तरफ नकारात्मक शक्तियां सक्रिय रहती है

FP Staff Updated On: Jul 12, 2018 02:28 PM IST

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अमावस्या-सूर्य ग्रहण: पितरों की पूजा और ब्रह्म भोज से करें इस दिन की शुरुआत

13 जुलाई को आषाढ़ महीने की अमावस्या है. हिंदू धर्म में अमावस्या और पूर्णिमा का बहुत महत्व होता है. इस दिन पितरों की पूजा की जाती है और साथ में ब्रह्म भोज भी कराया जाता है. 13 जुलाई यानी शुक्रवार को सूर्य ग्रहण भी है इसलिए इस दिन का महत्व और भी ज्यादा है.

हमें अमावस्या के दिन कुछ भी बुरा नहीं करना चाहिए. इस दिन वैष्णव भोजन ही खाना चाहिए. इसके अलावा नशा भी नहीं करना चाहिए. इस दिन हमें सुबह जल्दी उठना चाहिए और सुबह पितरों को याद करना चाहिए. माना जाता है कि इस दिन हमारे पूर्वजों की आत्मा साक्षात उपस्थित होती है. इसलिए हम पितरों की पूजा कर उनसे अपने घर के लिए सुख-शांति की कामना करते हैं. अमावस्या पर पीपल के पौधे की भी पूजा की जाती है. पीपल पर जल चढ़ाकर और सरसों के तेल का दीपक जलाकर भी पूजा कर सकते हैं. इसे भी एक तरीके से पितरों की पूजा का दर्जा प्राप्त है. इससे भी हमारे पितरों को शांति प्राप्त होती है.

माना जाता है कि इस दिन भूत-प्रेत, अशुभ साया और दैत्य सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं. इसकी वजह से हमारे चारों तरफ नकारात्मक शक्तियां सक्रिय रहती है. हमें अमावस्या की रात अकेले सुनसान जगह पर जाने से बचना चाहिए. इस दिन खासतौर से शमशान की तरफ बिल्कुल नहीं जाना चाहिए.

अमावस्या पर लड़ाई-झगड़े से भी बचना चाहिए. इससे आपकी पूजा में विघन पड़ता. घरेलू झगड़े ज्यादा हो तो इस दिन उन्हें सुलझाने की भी कोशिश करनी चाहिए. अमावस्या पर अगर आप परिवार के लोगों से वाद-विवाद करते हैं तो आपके पितर इससे नाराज हो जाते हैं. जिससे उनकी कृपा बीच में ही रुक जाती है.

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