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स्वच्छ भारत मिशन: केंद्र की रिपोर्ट ने राज्यों की खोली पोल

सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक देश के किसी भी राज्य में 100 फीसदी टॉयलेट की सुविधा नहीं है, जबकि कई राज्य यह दावा कर रहे हैं

Updated On: Aug 08, 2017 08:20 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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स्वच्छ भारत मिशन: केंद्र की रिपोर्ट ने राज्यों की खोली पोल

सरकार ने तीन साल पहले स्वच्छता अभियान शुरू किया था. पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ने मंगलवार को इस अभियान पर एक थर्ड पार्टी सर्वे रिपोर्ट पेश की है. स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2017 की रिपोर्ट ने सरकार के इस अभियान की पोल खोल दी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, देश में एक भी ऐसा राज्य नहीं है जो खुले शौच से मुक्त यानी ओडीएफ (open defecation free) हो.

क्या है रिपोर्ट?

सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक देश के किसी भी राज्य में 100 फीसदी टॉयलेट की सुविधा नहीं है. दिलचस्प है कि इनमें वे राज्य भी शामिल हैं जो खुद को पहले ही ओडीएफ घोषित कर चुके हैं. अभी तक कुल 5 राज्य सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, केरल, हरियाणा और उत्तराखंड खुद को ओडीएफ स्टेट घोषित कर चुके हैं. लेकिन, मंत्रालय के सर्वे ने इन दावों को गलत करार दे दिया है.

सबसे फिसड्डी है बिहार

इस सर्वे में बिहार महज 30 फीसदी टॉयलेट उपलब्धता के साथ सबसे फिसड्डी है. उत्तर प्रदेश 37 फीसदी और जम्मू-कश्मीर 41 फीसदी के साथ स्वच्छ भारत अभियान के लिए चुनौती बने हुए हैं.

सर्वे के मुताबिक देश भर में केवल 65 प्रतिशत आंगनबाड़ी में ही शौचालय उपलब्ध हैं. इसी सर्वे के मुताबिक देश भर में केवल 76 प्रतिशत स्वास्थ्य केन्द्रों में ही टॉयलेट की सुविधा मौजूद है.

क्या है मंत्रालय का कहना?

इस मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि यह सर्वे राज्यों के दावों की जांच करने के लिए किया गया था. यह सर्वे राज्यों के लिए फीडबैक का काम करेगा जिससे वह हालात बेहतर कर सकते हैं. तोमर ने दावा किया कि साल 2019 तक पूरे देश को खुले में शौच की समस्या से मुक्त किया जा सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन लॉन्च हुए 3 साल हो गए हैं. तीन साल पूरे होने पर स्वच्छ सर्वेक्षण गांव 2017 की रिपोर्ट केंद्रीय मंत्री, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय, नरेंद्र सिंह तोमर और सचिव श्री परमेश्वर अय्यर ने नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में जारी किया गया.

toilet ek prem katha narendra modi

क्वालिटी कांउसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) ने सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में ग्रामीण स्वच्छता की मौजूदा स्थिति का मूल्यांकन किया है. मंत्रालय ने इसे स्वच्छता सर्वेक्षण रिपोर्ट 2017 नाम दिया है. स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2017 के तहत क्यूसीआई ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस साल मई-जून तक 4 हजार 626 गांवों में 1 लाख 4 हजार ग्रामीण परिवारों का सर्वेक्षण किया.

क्या है हकीकत? 

इस सर्वेक्षण रिपोर्ट में पाया गया कि ग्रामीण भारत में कुल शौचालय कवरेज 62.45 फीसदी है. स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) एमआईएस ने 63.73 फीसदी कवरेज होने की सूचना दी है. सर्वे में यह भी कहा गया है कि 91.29 फीसदी लोगों की पहुंच टॉयलेट तक है और इसका इस्तेमाल भी कर सकते हैं.

सरकार गांव-गांव में स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौचमुक्त अभियान चला रही है. इसके बाद गांवों में शौचालय निर्माण के लक्ष्य तय किए गए हैं.

स्वच्छता के आधार पर होगी रैंकिंग 

मंत्रालय के पीसी में यह घोषणा की गई कि राज्यों और जिलों को उनके स्वच्छता कवरेज और ठोस तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए भारत के सभी जिलों को रैंकिंग शुरू की जाएगी.

यह रैंकिंग तीन महीने में एकबार होगी. गांवों के प्रदर्शन, स्थिरता और पारदर्शिता के मापदंडों के आधार पर रैंकिंग की जाएगी.

कब होगा रैंकिंग का ऐलान

प्रथम रैंकिंग की घोषणा जुलाई 2017 की तिमाही के लिए 2 अक्टूबर, 2017 को की जाएगी. जिलों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को स्थापित करने के लिए पुरस्कार भी दिया जाएगा.  स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण शुरू होने के बाद 4.54 करोड़ से ज्यादा घरों में शौचालय बनाए गए हैं. 2 लाख 20 हजार 104 गांवों, 160 जिलों और 5 राज्यों ने ओडीएफ को घोषित किया है.

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