S M L

वर्ल्ड रिफ्यूजी डे: एक सीरियाई रिफ्यूजी बनी यूनिसेफ की गुडविल एंबेसेडर

मुजूं अल्मेल्लेहां जॉर्डन के रिफ्यूजी कैंप में बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर चुकी हैं.

FP Staff Updated On: Jun 20, 2017 06:40 PM IST

0
वर्ल्ड रिफ्यूजी डे: एक सीरियाई रिफ्यूजी बनी यूनिसेफ की गुडविल एंबेसेडर

आज यानी 20 जून को वर्ल्ड रिफ्यूजी डे है. इस मौके पर यूनिसेफ ने एक सीरियाई रिफ्यूजी को गुडविल एंबेसेडर के रूप में चुना है. 19 साल की मुजूं अल्मेल्लेहां अब तक की सबसे कम उम्र की गुडविल एंबेसेडर बन गई हैं. इसके पहले हॉलीवुड की अभिनेत्री ऑड्रे हेपबर्न कम उम्र की एंबेसेडर रह चुकी हैं

इसके साथ ही पहली बार यूनिसेफ के पास एक आधिकारिक रूप से रिफ्यूजी स्टेटस की एंबेसेडर है. मुजूं 19 साल की एजुकेशन एक्टिविस्ट हैं. वो जॉर्डन के जा'तारी रिफ्यूजी कैंप से हैं.

मुजूं ने कहा, 'मैं एक बच्ची थी लेकिन मैं जानती थी कि मेरे भविष्य की चाभी बस एजुकेशन में ही है. इसलिए जब मैं सीरिया से भागी तो मैंने अपने साथ बस अपनी स्कूल की किताबें ही रखी थी.'

मुजूं ने आगे कहा, 'एक रिफ्यूजी होने के नाते मैंने देखा कि क्या होता है जब बच्चों की जल्दी शादी करा दी जाती है या मजदूरी में झोंक दिया जाता है. वो शिक्षा के अवसर खो देते हैं, अपना भविष्य खो देते हैं.'

मुजूं अपने परिवार के साथ 2013 में सीरिया में चल रहे संघर्ष के चलते जॉर्डन के रिफ्यूजी कैंप भाग गई थीं. वहां से अब वो ब्रिटेन में नई जिंदगी जी रही है. जॉर्डन के रिफ्यूजी कैंप के अपने 18वें महीने में मुजूं ने वहां के बच्चों की शिक्षा को लेकर कोशिशें शुरू कर दी थी. खासकर उनका ध्यान लड़कियों की पढ़ाई पर था.

चाड में अफ्रीकी बच्चियों से मिलतीं मुजूं.

चाड में अफ्रीकी बच्चियों से मिलतीं मुजूं.

मुजूं अभी हाल ही में यूनिसेफ के साथ अफ्रीकी देश चाड गई हुई थीं. शिक्षा के क्षेत्र में चाड की हालत बहुत खराब है. वहां से वापस आने के बाद से मुजूं उन बच्चों की स्थिति को समझने और उनकी शिक्षा की जरूरत को समझाने के लिए काम कर रही हैं, जो किसी संघर्ष या अशांति से प्रभावित होकर शिक्षा से वंचित रह जाते हैं.

एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया में तकरीबन 2 करोड़ 5 लाख बच्चे, जिन्हें प्राइमरी और सेकेंड्री स्कूल में होना चाहिए, शिक्षा से वंचित हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi