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स्मार्टफोन और टीवी से लोगों की जासूसी कर रहा सीआईए, विकीलीक्स का खुलासा

मंगलवार को विकीलीक्स द्वारा लीक डॉक्युमेंट्स में ये खुलासा हुआ है

FP Staff Updated On: Mar 08, 2017 11:21 AM IST

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स्मार्टफोन और टीवी से लोगों की जासूसी कर रहा सीआईए, विकीलीक्स का खुलासा

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के बारे में हुआ खुलासा दुनियाभर के टेक्नोलॉजी यूजर्स की चिंता बढ़ा सकता है. सीआईए स्मार्ट टीवी, स्मार्टफोन्स और एंटी वायरस सॉफ्टवेयर के जरिए लोगों की जासूसी कर रहा है.

मंगलवार को विकीलीक्स द्वारा लीक डॉक्युमेंट्स में ये खुलासा हुआ है. सभी डॉक्युमेंट्स सीआईए के सेंटर फॉर साइबर इंटेलिजेंस से लिए गए हैं. इनके मुताबिक, गैजेट्स में सेव ऑडियो फाइल्स, फोटोज और प्राइवेट टेक्स्ट पर भी सीआईए की नजर है.

यहां तक की कम्युनिकेशन के लिए इस्तेमाल हो रहीं एनक्रिप्टेड एप्लीकेशन्स भी सुरक्षित नहीं हैं. हालांकि, सीआईए ने इन डॉक्युमेंट्स पर टिप्पणी करने से इनकार किया है. लेकिन, विकीलीक्स पिछले कई सालों से अमेरिका समेत कई देशों के खुफिया डॉक्युमेंट्स लीक करता आ रहा है. ऐसे में कई टेक एक्सपर्ट्स इसे सही मान रहे हैं.

कई बड़ी कंपनियों के स्मार्टफोन्स पर है नजर

विकीलीक्स ने टेक्निकल टॉपिक्स से रिलेटेड 8,761 डॉक्युमेंट्स लीक किए हैं. इनमें सीआईए की हैकिंग टेक्नोलॉजी का ब्यौरा है. इसके मुताबिक, सीआईए लोगों के स्मार्ट टीवी को सर्विलांस डिवाइस के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है.

इसमें यह भी बताया गया है कि सीआईए अमेरिकन सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स और स्मार्टफोन्स को जासूसी के लिए इस्तेमाल करने पर काम कर रहा है. इनमें एप्पल के आईफोन, गूगल का एंड्रॉयड और माइक्रोसॉफ्ट विंडोज शामिल हैं.

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सैमसंग के स्मार्ट टीवी सीआईए सर्वर को भेज रहा रिकॉर्डिंग

विकीलीक्स ने डॉक्युमेंट्स के आधार पर बताया कि जासूसी के लिए एजेंसी ने खुद ही कुछ सॉफ्टवेयर तैयार किए हैं. जून 2014 के डॉक्युमेंट्स में मिशन 'वीपिंग एंजेल' की जानकारी सामने आई है. यह एक तरह का हैकिंग बग है, जिसे सीआईए और ब्रिटिश खुफिया एजेंसी एमआई5 ने तैयार किया है. यह सैमसंग स्मार्ट टीवी (खासकर F8000 स्मार्ट टीवी) पर काम करता है.

यह बग टीवी में 'फेक ऑफ' मोड एक्टिव कर देता है. यूजर को लगता है कि वो टीवी ऑफ कर चुका है, जबकि वो खुफिया तरीके से ऑन रहता है और कमरे की वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग करके इंटरनेट के जरिए सीआईए सर्वर को भेज देता है.

एनक्रिप्टेड एप्स में बायपास एक्सेस

विकीलीक्स के मुताबिक, सीआईए सुरक्षित मानी जाने वालीं कई एनक्रिप्टेड कम्युनिकेशन एप्लीकेशन्स की जासूसी कर रही है. इनमें सिग्नल, टेलीग्राम और वॉट्सएप भी शामिल हैं. एजेंसी बायपास प्रोसेस के जरिए एनक्रिप्शन को क्रैक किए बिना यूजर्स का डाटा देख रही है.

डॉक्युमेंट्स में सामने आए ये मालवेयर और एप्लीकेशन्स

ब्रूटल कंगारू : यह सीआईए द्वारा तैयार किया गया मालवेयर है, जो विंडोज के जरिए कम्प्यूटर में घुसपैठ करता है. फाइल्स में इस मालवेयर को छिपाकर सिस्टम में डाला जाता है.

फाइन डाइनिंग : यह 24 लुभावनी एप्लीकेशन्स का समूह है, जिसका इस्तेमाल सीआईए कम्प्यूटर डाटा को करप्ट करने और उसे चुराने में करती है.

कटथ्रॉट और स्विंडल : यह सीआईए द्वारा तैयार किया गया मल्टी प्लेटफॉर्म मालवेयर है, जो विंडो, लाइनेक्स और सोलारिस ऑपरेटिंग सिस्टम को इन्फेक्ट करता है.

हैमर ड्रिल : सीडी और डीवीडी के जरिए इस मालवेयर को विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम वाले कम्प्यूटर में डाला जाता है और हैकिंग की जाती है.

( साभार: न्यूज 18 )

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