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ब्रिटेन चुनाव 2017: उलटा पड़ा थेरिसा मे का चुनावी दांव

थेरिसा मे ने घोषणा कि वह प्रधानमंत्री बनी रहेंगी और यूरोपीय संघ के साथ ब्रेग्जिट को लेकर बातचीत तय योजना के अनुरूप दस दिनों में शुरू कर देंगी

Bhasha Updated On: Jun 09, 2017 11:34 PM IST

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ब्रिटेन चुनाव 2017: उलटा पड़ा थेरिसा मे का चुनावी दांव

ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरिसा मे का ब्रेग्जिट चर्चाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए समय से पहले चुनाव कराने का दांव उल्टा पड़ गया और मतदाताओं ने उन्हें संसद में बहुमत नहीं दिया.

ब्रेग्जिट के लिए बातचीत के मुश्किल दौर से पहले त्रिशंकु संसद के साथ थेरिसा को अब सत्ता में बने रहने की खातिर उत्तरी आयरलैंड के एक दल का समर्थन लेने को मजबूर हो गई हैं.

नहीं देंगी इस्तीफा थेरिसा

हालांकि चुनाव में झटका लगने के बावजूद थेरिसा अपने इस्तीफे की मांगों को लेकर बेपरवाह रहीं और जोर देते हुए कहा कि वह डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी (डीयूपी) के अनौपचारिक समर्थन के साथ सरकार का गठन करेंगी.

उन्होंने घोषणा कि वह प्रधानमंत्री बनी रहेंगी और यूरोपीय संघ के साथ ब्रेग्जिट को लेकर बातचीत तय योजना के अनुरूप दस दिनों में शुरू कर देंगी.

10 डाउनिंग स्ट्रीट (ब्रिटिश सरकार का मुख्यालय) के बाहर उदास चेहरे के साथ मे ने एक बयान में कहा, ‘मैं अभी अभी महारानी से मिलकर आ रही हूं और अब सरकार का गठन करूंगी, वह सरकार जो हमारे देश के लिए निश्चितता का दौर लेकर आए और इस गंभीर समय में उसे आगे की तरफ ले जाए.’

60 वर्षीय नेता ने कहा कि दोनों दलों के बीच सालों से मजबूत संबंध रहे हैं और उनका मानना है कि वे देश हित में साथ काम करने में सक्षम होंगे.

उन्होंने कहा, ‘इससे हमें एक देश के रूप में साथ आने और हमारी दीर्घकालीन खुशहाली सुनिश्चित करने के लिए यूरोपीय संघ के साथ एक नई साझेदारी हासिल कर देश में हर किसी के लिए फायदेमंद एक सफल ब्रेग्जिट समझौते की दिशा में अपनी उर्जा का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी. पिछले साल जून में लोगों ने जनमत सर्वेक्षण में इसी के लिए मत दिया था.’

सवालों के घेरे में थेरिसा का फैसला 

हालांकि थेरिसा मे की कंजरवेटिव पार्टी चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है, जेरेमी कॉर्बिन के नेतृत्व में लेबर पार्टी के अच्छे प्रदर्शन ने देश की राजनीति को संकट की स्थिति में डाल दिया है और 19 जून को निर्धारित ब्रेग्जिट वार्ता से पहले थेरिसा को एक जटिल स्थिति में पहुंचा दिया है.

इन चुनावी नतीजों समयपूर्व चुनाव कराने का थेरिसा का फैसला सवालों के घेरे में आ गया है.

करीब करीब सभी 650 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं. इनमें कंजरवेटिव पार्टी को 318 जबकि विपक्षी लेबर पार्टी को 261 सीटें मिली हैं और दोनों ही दल पूर्ण बहुमत के लिए जरूरी 326 सीटों के जादुई आंकड़े से दूर हैं.

कंजरवेटिव पार्टी को अब सरकार के गठन के लिए डीयूपी के दस सांसदों पर निर्भर होना पड़ेगा.

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जेरेमी कॉर्बिन ने मांगा इस्तीफा 

चुनाव पूर्ण अनुमानों में कंजरवेटिव पार्टी को आसानी से बहुमत मिलने की बात कही जा रही थी, लेकिन उसकी चौंकाने वाली हार को अब ब्रिटिश मीडिया थेरिसा के अपने पद पर बने रहने के लिहाज से ‘शर्मिंदगी’ की बात बता रहा है.

कॉर्बिन भले ही चुनाव में थेरिसा को शिकस्त देने में नाकाम रहे हों लेकिन उनकी पार्टी के अच्छे प्रदर्शन ने उन्हें थेरिसा से इस्तीफा मांगने को प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि 'थेरिसा को इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि उन्होंने वोट गंवा दिए और लोगों का समर्थन एवं विश्वास खो दिया.’

अप्रैल में थेरिसा ने निर्धारित समय से तीन साल पहले इस साल जून में चुनाव कराने का आह्वान किया था ताकि वे व्यापक जनादेश के साथ ब्रेग्जिट चर्चाओं में हिस्सा ले सकें.

चुनाव के नतीजे से आतंकवाद संबंधी बढ़ती घटनाओं के बीच देश में एक राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है.

लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉरबिन

लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन

कंजरवेटिव पार्टी में विद्रोह के स्वर 

37,780 वोट के साथ थेरिसा ने दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड के मेडनहेड सीट से चुनाव जीता लेकिन चुनाव से पहले संसद में पार्टी को हासिल बहुमत गंवाने के बाद उनपर इस्तीफे का दबाव बढ़ गया.

इस चुनाव को ब्रेग्जिट चुनाव के तौर पर देखा जा रहा था और इस परिणाम को उन 48 प्रतिशत लोगों के लिए उम्मीद की किरण समझा जा रहा है जिन्होंने जून 2016 में हुए जनमत संग्रह में यूरोपीय संघ में बने रहने के लिए वोट दिया था.

कंजरवेटिव पार्टी की सांसद अन्ना सोब्री ने इन चुनाव परिणामों को ‘भयानक’ और ‘त्रासदी’ करार देते हुए प्रधानमंत्री थेरिसा के पद पर बने रहने पर सवाल खड़े किए.

लेबर पार्टी के 68 वर्षीय नेता कॉर्बिन ने थेरिसा से ‘पद छोड़ने’ की मांग करते हुए कहा कि वह ‘देश की सेवा करने के लिए तैयार हैं’ क्योंकि थेरिसा मध्यावधि चुनाव कराने की अपनी बाजी हार चुकी हैं. लेकिन टेरिजा ने इस्तीफा देने की संभावनाएं खारिज कर दीं.

विशाल बहुमत की उम्मीद धराशायी होने की बात मानते हुए थेरिसा ने कहा, ‘मेरा संकल्प वही है जो पहले था. परिणाम जो भी आए, कंजरवेटिव पार्टी अब भी स्थिरता की पार्टी बनी रहेगी.’ उन्होंने कहा कि इस समय देश को स्थिरता के दौर की जरूरत है और उनकी पार्टी यह सुनिश्चित करेगी कि वह स्थिरता का यह दौर प्रदान करे.

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