S M L

पेरिस समझौता: भारत को लेकर ट्रंप के किए दावे हैं फर्जी, जानिए कैसे

यह बात गलत है कि भारत या किसी अन्य देश का पेरिस समझौते में बना रहना विदेशी आर्थिक सहायता के चलते है

FP Staff Updated On: Jun 03, 2017 01:20 PM IST

0
पेरिस समझौता: भारत को लेकर ट्रंप के किए दावे हैं फर्जी, जानिए कैसे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उनके देश के पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलने के लिए दिए गए कारण सच्चाई से बहुत दूर हैं.

डोनाल्ड ट्रंप ने एक भाषण के दौरान यह घोषणा करते हुए समझौते से बाहर होने के लिए भारत और चीन को इस समझौते से मिल रही 'अनुचित' छूट और 'भारी भरकम' आर्थिक सहायता को जिम्मेदार बताया.

दावों का सच से लेना-देना नहीं

उनके दावों का विश्लेषण करने पर ये तथ्यों से परे पाए गए हैं.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक ट्रंप की बातों में सच्चाई नहीं है. ट्रंप ने भाषण के दौरान कहा था कि भारत इस समझौते में बने रहने के लिए 'बिलियंस एंड बिलियंस एंड बिलियंस' (कई-कई बिलियन) डॉलरों की आर्थिक सहायता मांग रहा है.

सच्चाई यह है कि भारत को 2015 में कुल मिला कर मात्र 3.1 बिलियन डॉलर की विदेशी सहायता मिली. इसमें अमेरिका से 100 मिलियन डॉलर की सहायता शामिल है. इसे भी 2018 तक घटा कर 34 मिलियन डॉलर कर दिया जाएगा.

इसके अलावा ट्रंप ने बताया कि ग्रीन क्लाइमेट फंड (जीसीएफ) 100 बिलियन डॉलर का फंड है जबकि असल में यह मात्र 10.3 बिलियन डॉलर का फंड है. उन्होंने यह भी कहा कि जीसीएफ में अमेरिका के लिए दसों बिलियन डॉलर की सहायता राशि देना अनिवार्य है जबकि दरअसल यह सहायता देना स्वेक्षिक है.

किसी एक देश की मर्जी से नहीं बदला जा सकता समझौता

पेरिस का यह समझौता, जिसे 194 देशों द्वारा अपनाया गया था, को किसी एक देश की मर्जी की मुताबिक नहीं बदला जा सकता पर ट्रंप ने कहा है कि वो समझौते के नियमों को 'अमेरिकी हितों' के मुताबिक बदलवा कर ही समझौते में दोबारा शामिल होंगे.

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ट्रंप का यह दावा झूठ है कि भारत को 2020 तक अपने कोयला उत्पादन को दोगुना करने की छूट दी गई है लेकिन अमेरिका को अपना उत्पादन बंद करना होगा. दरअसल, समझौते के मुताबिक किसी भी देश को कोयला उत्पादन जारी रखने पर कोई रोक नहीं है.

भारत का समझौते में बना रहना विदेशी सहायता का मोहताज नहीं यह बात गलत है कि भारत या किसी अन्य देश का पेरिस समझौते में बना रहना विदेशी आर्थिक सहायता के चलते है. भारत ने मुख्य रूप से तीन वादे किये हैं. पहला कि भारत अपने कार्बन उत्सर्जन में 2005 के स्तर के मुकाबले 2030 तक 33-35 प्रतिशत की कमी लाएगा.

दूसरा कि भारत अपने वनों के क्षेत्रफल को बढ़ाएगा ताकि वो 2030 तक 2.5 से 3 बिलियन टन तक अतिरिक्त कार्बन सोख सकें. भारत ने यह भी वादा किया है कि भारत अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता का कम से कम 40 प्रतिशत उत्पादन प्रदूषण रहित स्रोतों से करेगा.

मोदी के अमेरिका दौरे से पहले रिश्तों पर हो सकता है बुरा असर

ट्रंप के इन बयानों के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले दोनों देशों के रिश्तों में जटिलता आने की संभावना है. प्रधानमंत्री इसी महीने अमेरिका दौरे पर जाने वाले हैं जहां वो ट्रंप से उनके राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार मुलाकात करेंगे.

सेंट पीटर्सबर्ग में दिए अपने भाषण के दौरान मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति को सीधे निशाने पर नहीं लिया पर इतना जरूर कहा कि भारत पर्यावरण को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है.

दुनियाभर में हो रही है आलोचना

गौरतलब है कि ट्रंप के बयान के बाद पूरी दुनिया से उन पर चौतरफा हमले शुरू हो गए हैं. जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और इटली के प्रधानमंत्री पाओलो जेंतिलोनी ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिका के इस फैसले पर एतराज जताया है.

इसके अलावा ब्रिटेन, कनाडा और मेक्सिको ने भी इस मामले में ट्रंप के फैसले पर खेद जाहिर किया.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi