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मैं दुनिया का नहीं, अमेरिका का प्रतिनिधि हूं: ट्रंप

ट्रंप ने कहा हम सच्चाई और स्थिरता चाहते हैं जंग और संघर्ष नहीं

IANS | Published On: Mar 01, 2017 08:25 PM IST | Updated On: Mar 01, 2017 08:25 PM IST

मैं दुनिया का नहीं, अमेरिका का प्रतिनिधि हूं: ट्रंप

दुनिया को अपने हितों और नजरिए के अनुरूप ढालने की हमेशा से चली आ रही अमेरिकी पॉलिसी से हटते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि, ‘उनका काम दुनिया का रिप्रेजेंट करना नहीं है, बल्कि अन्य देशों के अपना रास्ता चुनने के अधिकार का सम्मान करते हुए अमेरिका के हितों को टॉप प्रायोरिटी देना है.

ट्रंप ने मंगलवार रात को अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा, ‘मेरा काम दुनिया को रिप्रेजेंट करना नहीं है. मेरा काम अमेरिका को रिप्रेजेंट करना है.’

ट्रंप ने 'अमेरिका फर्स्ट' की अपनी पॉलिसी का पक्ष रखते हुए कहा कि, 'अमेरिका अन्य देशों के संप्रभुता के अधिकार का सम्मान करेगा.'

उन्होंने कहा, ‘आजाद देश में ही जनता अपनी इच्छा व्यक्त कर सकती है. और अमेरिका सभी देशों द्वारा अपना रास्ता चुनने के अधिकार का सम्मान करता है.  हम जानते हैं कि अमेरिका का हित इसी में है कि दुनिया में कम संघर्ष हो.’

ट्रंप ने अलग-थलग पड़ने की बात करने के बजाए कहा, ‘हमारी विदेश पॉलिसी दुनिया के साथ सीधा, मजबूत और सार्थक रिश्ता रखने की है. इसके लिए अमेरिका नए दोस्त तलाशेगा, साझा हितों के आधार पर नई पार्टनरशिप बनाएगा. हम सच्चाई और स्थिरता चाहते हैं, जंग और संघर्ष नहीं.’

जारी रहेगी आईएस के खिलाफ जंग 

अमेरिकी नेतृत्व के बारे में उन्होंने कहा, ‘यह दुनियाभर के हमारे सहयोगी देशों के साथ हमारे महत्वपूर्ण सुरक्षा हितों पर आधारित है.’

ट्रंप के मंगलवार के भाषण में 20 जनवरी के उनके शपथ ग्रहण भाषण में पेश किए गए 'अमेरिका फर्स्ट' के एजेंडे में थोड़ा नरम रुख दिखाई दिया.

ट्रंप ने एक बार फिर आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) को 'तबाह और बर्बाद करने' का वादा दोहराया. उन्होंने कहा कि, ‘यह एक ऐसा गैरकानूनी खूंखार संगठन है जो मुसलमानों, ईसाइयों, पुरुषों, महिलाओं, बच्चों और सभी धर्मो-विश्वासों के लोगों की हत्या करता है.'

ट्रंप ने कहा, ‘हम अपने इस दुश्मन का धरती से नामो निशान मिटाने के लिए मुस्लिम समाज के अपने दोस्तों और सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेंगे.’

राष्ट्रपति ने नाटो और अन्य सहयोगियों के प्रति समर्थन जारी रखने के आश्वासन के साथ फिर अपनी शर्त दोहराते हुए कहा कि, ‘सभी देशों को इसके लिए आर्थिक साझेदारी का दायित्व निभाना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘अब हमारी बेहद मजबूत और फ्रेंडली चर्चा के बाद वे ऐसा ही करने लगे हैं. हम नाटो से लेकर मध्य-पूर्व और प्रशांत तक सामरिक और सैन्य अभियानों में अपने साझेदारों की सीधी और सार्थक भूमिका की उम्मीद करते हैं. और साथ ही चाहते हैं कि वे इसमें समुचित आर्थिक भागीदारी निभाएं.’

अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि, ‘वह फ्री व्यापार में विश्वास करते हैं. लेकिन मानते हैं कि यह सही नहीं है कि इससे लाखों अमेरिकी नौकरियों का नुकसान हो. मैं अमेरिका की कंपनियों और कर्मचारियों की कीमत पर औरों को और अधिक फायदा नहीं उठाने दूंगा.’

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